किश्तों में जारी हुए वायरल वीडियो ने आग में घी का काम किया
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। भाजपा के नफा-नुकसान रुझान पहले ही मिलने लगा था। कौशाम्बी में भाजपा की नइया डूबने के पीछे कई कारण रहे। बेरोजगारी को लेकर युवाओं में नाराजगी, पार्टी में फैली अंतर्कलह और विभिन्न समुदाय को लेकर भाजपा की प्रत्याशी की टिप्पणियां चुनाव में उभरी तो हार स्कि्प्ट तैयार होने लगी। वायरल वीडियो से ब्राह्मण, वैश्य और पासी समाज प्रत्याशी से खासा खफा था।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर मौर्या समाज के आक्रोश ने आग में घी का काम किया। जिससे यह वोट भी भाजपा के पाले से छिटक गए। पेश है तीनों विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की विश्लेषण करती
रवींद्र अग्रहरि की रिपोर्ट....
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सदर : सपा के साथ गया बसपा का कैडर
पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का असर यहां भी दिखा था। इसके अलावा चुनाव में गठबंधन के कारण बसपा उम्मीदवार मैदान में नहीं होने से बसपा का कैडर वोटों में गिना जाने वाला गैर पासी दलित वोटर भी बीजेपी के पाले में चला गया था। लेकिन, इस बार सपा अपने इस वोट बैंक को मजबूत करने में सफल रहा। यही नहीं सरसवां क्षेत्र में भाजपा को एकतरफा वोट देने वाला ब्राह्मण व पटेल वर्ग भी प्रत्याशी को लेकर खफा था। सपा के पक्ष में वोट करके इन दोनों समाज के मतदाताओं ने अपनी नाराजगी जताई। नतीजा, सपा के पुष्पेंद्र सरोज को मजबूती मिली।
चायल : युवा मतदाताओं ने दिया सपा का साथ
इस विधानसभा क्षेत्र में संविधान में बदलाव को लेकर चल रहीं चर्चाओं ने भाजपा को कमजोर कर दिया। पासी, मुसलमान और यादव वर्ग तो पहले से ही सपा के पक्ष में था। इस मुद्दे पर भाजपा का विरोध करके सपा ने दलित व पिछड़े वर्ग के अन्य वोटरों को भी अपने पाले में कर लिया। इस चुनाव में भाजपा को शिकस्त दिलाने में युवा वोटरों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बेरोजगारी व पेपर लीक मामले को नाराज नौजवान बड़ी उम्मीदें लेकर सपा के साथ चले गए। जिसका नुकसान भाजपा को हुआ।
सिराथू : मौर्य बिरादरी ने नहीं दिया पूरा साथ
भाजपा की हार में इस विधानसभा का भी बड़ा हाथ रहा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से डिप्टी सीएम केशव मौर्य हार गए थे। इसके बाद एक संदेश यह चला कि इस हार में भाजपाइयों का ही हाथ रहा। क्षेत्र के करीब 30 हजार मौर्य समाज के वोटरों के दिलों में यह बात घर कर रही है। जिसका असर लोकसभा चुनाव में दिखा। मौर्य समाज तो कटा ही, महंगाई व प्रत्याशी को लेकर नाराज कड़ा क्षेत्र के तमाम ब्राह्मण, वैश्य व अन्य वर्ग भी सपा के साथ हो लिया, जिससे भाजपा कमजोर पड़ गई।