करारी क्षेत्र के गुवारा तैयबपुर गांव में शुक्रवार को ईद ए मिलाद उन नबी के पर्व पर जुलूस निकालने को लेकर दो वर्ग के लोग आमने-सामने आ गए। सूचना पर एसडीएम-सीओ स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे।
करारी क्षेत्र के गुवारा तैयबपुर गांव में शुक्रवार को ईद ए मिलाद उन नबी के पर्व पर जुलूस निकालने को लेकर दो वर्ग के लोग आमने-सामने आ गए। सूचना पर एसडीएम-सीओ स्थानीय पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद परंपरागत रास्ते से जुलूस निकलवाया गया।
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गुवारा तैयबपुर गांव में ईद मिलादुन्नवी के मौके पर कुछ लोग जुलूस निकालते हैं। शुक्रवार को ईदमिलादुन्नवी के मौके पर जुलूस निकालने की तैयारी चल रही थी। हिन्दू समुदाय के कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस परंपरागत रास्ते से न ले जाकर नरेश पासी के घर की तरफ नए रास्ते से ले जाना चाहते हैं। सूचना पर सदर एसडीएम एसपी सिंह सीओ शिवांक सिंह, कोतवाल सियाकांत चौरसिया के साथ भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना था कि पुराने रास्ते में लोगों ने काफी अतिक्रमण कर लिया है। इसलिए नए रास्ते से ले जाना चाहते हैं। जबकि हिन्दू समुदाय के लोगों का कहना था कि पुराने रास्ते से ही जुलूस निकाला जाए। पुलिस ने दोनों वर्ग के वयोवृद्ध लोगों व ग्रामीणों से बातचीत कर सत्यता जानने का प्रयास किया। जांच में पता चला कि जुलूस समसाद के घर से जामा मस्जिद तक जाता था। कभी भी जुलूस दक्षिण दिशा की ओर से चौराहा होते रामरतन यादव की घर की ओर नहीं गया।
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जुलूस में चार पहिया वाहन का प्रयोग नहीं होता था। कोरोना काल में जुलूस नहीं निकाला गया। वर्ष 2024 में नई परंपरा डालने का प्रयास किया गया था। तत्तकालीन इंस्पेक्टर विनीत सिंह नए परंपरा से जुलूस निकालने पर रोक लगा दिया था। इस पर एसडीएम के समझाने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग नरेश पासी के घर व पुरवा की तरफ न ले जाकर पुरानी परंपरा के अनुसार जुलूस समसाद के घर मस्जिद तक ले गए।