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Kaushambi News: डिजिटल पढ़ाई से बढ़ेगी प्रशिक्षुओं की दक्षता, कायाकल्प से स्कूलों में बढ़े बच्चे

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डॉ. नरेंद्र कुमार,शोधकर्ता
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राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने डायट कौशाम्बी को ''सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'' के रूप में चयनित किया था। इसके तहत जनपद की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन शोध विषय तय किए गए। ये सभी अध्ययन अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बंगलूरू के विशेषज्ञों के शैक्षणिक मार्गदर्शन, डायट प्राचार्य और उप शिक्षा निदेशक निधि शुक्ला के नेतृत्व में पूरे किए गए।
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डायट प्रवक्ता डॉ. दिनेश कुमार यादव ने बहुमाध्यम उपागम का डीएलएड प्रशिक्षुओं पर पड़ने वाले प्रभाव विषय पर शोध किया। शोध में पाया गया कि तकनीक आधारित शिक्षण से प्रशिक्षु अधिक सक्रिय होकर सीखते हैं और उनकी क्षमता में सकारात्मक सुधार हुआ है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि शिक्षक शिक्षा को नवाचारी बनाने के लिए इस पद्धति को व्यापक स्तर पर अपनाने की जरूरत है।
दूसरा शोध प्रवक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार द्वारा परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प का बच्चों की उपस्थिति पर प्रभाव विषय पर किया गया। निष्कर्षों से पता चला कि जिन विद्यालयों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां बच्चों की उपस्थिति और स्कूल के प्रति सकारात्मक रुझान बढ़ा है।
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तीसरा शोध प्रवक्ता डॉ. प्रमोद कुमार सेठ ने प्राथमिक शिक्षकों को प्राप्त विभिन्न प्रशिक्षणों का उनके कक्षा संचालन व शिक्षण शैली पर प्रभाव विषय पर पूरा किया। शोध में सामने आया कि आवश्यकता आधारित नियमित प्रशिक्षण से शिक्षकों की कार्यशैली अधिक प्रभावी हुई है और उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।
डायट प्राचार्य निधि शुक्ला ने कहा कि स्थानीय समस्याओं पर आधारित शोध शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इन तीनों शोधों के निष्कर्ष शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षण और शिक्षा विभाग के नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

डॉ. नरेंद्र कुमार,शोधकर्ता

डॉ. नरेंद्र कुमार,शोधकर्ता

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