कस्बे की 296 वर्ष पुरानी रामलीला का शुभारंभ शनिवार को मुकुट पूजन के साथ हुआ। वर्ष 1729 में बुंदेलों की ओर से शुरू की गई यह रामलीला आज भी परंपरा और आस्था का प्रतीक बनी हुई है। पहले यह रामलीला अलग-अलग स्थानों पर तीन दिन तक होती थी, लेकिन 1901 से इसे स्थायी मंच पर 13 दिन तक किया जाने लगा।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बताया कि इस वर्ष रामलीला की शुरुआत नारद मोह के मंचन से हुई है। आने वाले दिनों में श्रीराम जन्म, धनुष यज्ञ, वनवास, सीता हरण, लंका दहन और श्रीराम का राज्याभिषेक जैसी लीलाओं का मंचन किया जाएगा।
प्रत्येक दिन भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूपों का दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यह रामलीला बुंदेला सरदार छत्रसाल के पुत्र हरदे नारायण की ओर से शुरू कराई गई थी।
मुगलों से संघर्ष के दौरान बुंदेलों ने धार्मिक नाटकों के माध्यम से लोगों को एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। उसी से प्रेरित होकर करारी की रामलीला का सूत्रपात हुआ, जो अब तीन शताब्दियों से अधिक पुरानी परंपरा बन चुकी है। समय के साथ रामलीला के स्वरूप में बदलाव आया है लेकिन आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव की भावना आज भी वैसी ही बनी हुई है।
श्री रामलीला कार्यक्रम
- छह अक्तूबर: नारद मोह
- सात अक्तूबर: श्रीराम जन्म, ताड़का वध
- आठ अक्तूबर: नगर दर्शन, फुलवारी लीला
- नौ अक्तूबर: धनुष यज्ञ
10 अक्तूबर: परशुराम-लक्ष्मण संवाद
11 अक्तूबर: श्रीराम विवाह, कलेवा, वनवास
12 अक्तूबर: दशरथ मरण, भरत मिलाप (चित्रकूट)
13 अक्तूबर: सूर्पनखा नककटी, सीता हरण
14 अक्तूबर: श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, लंका दहन
15 अक्तूबर: अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति
16 अक्तूबर: कुंभकरण वध
17 अक्तूबर: अहिरावण-रावण वध
18 अक्तूबर: चारों भाइयों का मिलन और श्रीराम का राज्याभिषेक