सरायअकिल के करन चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार सुबह ऑपरेशन से प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने हालत गंभीर बताकर दोनों को मृत अवस्था में प्रयागराज के निजी अस्पताल रेफर कर दिया। पोस्टमार्टम कराए बगैर परिजनों ने जच्चा-बच्चा के शवों का घर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
नेवादा गांव निवासी विनोद कुमार दिवाकर मुंबई में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। बुधवार को विनोद की पत्नी सरिता देवी (25) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन पीएचसी नेवादा ले गए। जांच के बाद डाॅक्टरों ने बताया कि प्रसव में अभी 10-12 घंटे लग सकते हैं। इसके बाद परिजन सरिता को घर लेकर चले आए। रात दो बजे तकलीफ ज्यादा होने पर उसे दोबारा पीएचसी ले जाकर दिखाया गया तो डाॅक्टरों ने जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन जिला अस्पताल के बजाय बिचौलिए के माध्यम से प्रसव पीड़ित सरिता को करन चौराहा स्थित निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अस्पताल में डाॅक्टरों ने सरिता का ऑपरेशन कर प्रसव करवा दिया। उसने बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के कुछ देर बाद ऑपरेशन थियेटर में ही जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। आरोप है कि निजी अस्पताल संचालक व डाॅक्टरों ने दोनों की हालत गंभीर बताकर आनन फानन प्रयागराज के निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।वहां पहुंचने पर डाॅक्टरों ने जच्चा-बच्चा को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने दोनों का शव घर लाकर अंतिम संस्कार कर दिया है। खबर लिखे जाने तक मामले में किसी के खिलाफ कोई तहरीर नहीं दी गई थी।
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जच्चा-बच्चा की मौत का प्रकरण संज्ञान में आया है।टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी। लापरवाही मिलने पर अस्पताल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डाॅ.ललित कुमार सिंह-पीएचसी प्रभारी