जिले में 64 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें से 62 के गोदाम डीएपी खाद से खाली पड़े हैं। किसानों को आलू, सरसों, मटर, चना और गेहूं की बुआई करनी है लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है। किसान समितियों के चक्कर काटकर थक गए हैं। वहीं निजी दुकानों में डीएपी की भरमार है।
करीब 15 दिनों के बाद किसानों को डीएपी की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए वे अभी से डीएपी की तैयारी में जुट गए हैं। जिले की सरकारी गोदाम में डीएपी से खाली है। वहीं निजी गोदाम में डीएपी भरी पड़ी है। किसानों की मजबूर को देखते हुए दुकानदार उसने अधिक कीमत ले रहे हैं।
आंधावा के सुनील तिवारी, शिवदत्त और गुलाब लोधी सहित अन्य किसानों ने बताया कि बुआई का समय आने वाला है। खेती के लिए डीएपी सबसे ज्यादा जरूरी है। कभी इस समिति तो कभी उस समिति का चक्कर लगाना पड़ रहा है। किसान नेता चंदू तिवारी का कहना है कि किसानों की जरूरत पर ध्यान देने के बजाय अधिकारी अपने हिसाब से निर्णय लेते हैं। डीएपी की कमी इसका स्पष्ट उदाहरण है।
समितियों में 10 बोरी रखने का निर्देश
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि हर समिति में 10 बोरी का स्टॉक बचाकर रखने का मौखिक निर्देश है। यह केवल जांच आदि के लिए अग्रिम प्रबंध है लेकिन किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।
बोले किसान
धान के बाद किसानों को आलू की बुआई करनी है। जब जरूरत होती है, तब डीएपी नहीं मिलती। किसान मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर डीएपी खरीद रहे हैं। – सुनील तिवारी, किसान
हर साल मटर की खेती करता हूं। अगेती खेती लाभकारी होती है लेकिन समितियों से डीएपी नहीं मिल रही है। अब बाजार से खरीदने की तैयारी करनी पड़ रही है।– शाहिद अहमद, किसान
अभी किसानों को डीएपी की जरूरत नहीं है। आम तौर पर सितंबर के पहले सप्ताह से मांग शुरू होती है। जैसे ही मांग होगी समितियों पर डीएपी पहुंचा दी जाएगी।- मोसिम जमील, एआर कोऑपरेटिव
शाहिद अहमद, किसान
शाहिद अहमद, किसान