उड़िसा राज्य के दाना मांझी की तरह यूपी में कोई इंसान अपने कंधे पर लाश ढोने को मजबूर नहीं होगा। सरकार ने इसका इंतजाम कर दिया है । इसके लिए प्रदेश में शव परिवहन सेवा शुरू होेने जा रही है। सभी जिलों में 108 व 102 एंबुलेंस की तरह शवों को ढोने के लिए वाहन चलाएं जाएंगे। ये वाहन वातानुकूलित होंगे और एक फोन कॉल पर उपलब्ध होंगे।
दुर्घटना अथवा राजकीय चिकित्सालयों में अथवा दैवीय आपदा में यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को घर अथवा अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचाने के लिए पीड़ित के परिजनों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी जनपदों में शव परिवहन सेवा शुरू करने का निर्णय लिया है। ये सेवा फोन काल पर मिलेगी। इसके लिए जिले में एक कंट्रोल रूम भी खोला जाएगा। यह सेवा एंबुलेंस 108 व 102 की तरह होगी। शव ढोने वाले वाहन पूरी तरह से वातानुकूलित रहेंगे ताकि शव सुरक्षित रहे। प्रमुख सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने के लिए 26 अगस्त को महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं को निर्देश जारी कर दिया है।
कौन है दाना मांझी
उड़िसा के कालाहांडी जिले का दाना मांझी देश ही नहीं बल्कि में दुनिया में चर्चा का विषय बन गया था। दाना मांझी की पत्नी अमंगा दई की अस्पताल में मौत हो गई थी। रुपया न होने पर अस्पताल से शव घर ले जाने के लिए वाहन नहीं दिया गया तो कंधे पर लादकर पत्नी का शव 12 किमी दूर तक ले गया था। इस घटना के दूसरे ही दिन प्रदेश सरकार ने शव परिवहन सेवा शुरू कराने की कवायद शुरू कर दी थी।
संस्थाओं को मिल सकती है जिम्मेदारी
प्रमुख सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने महानिदेशक को निर्देश दिया है कि शव परिवहन सेवा की जिम्मेदारी सरकारी तंत्र के अलावा प्रतिष्ठित स्वयं सेवी, चैरिटेबल सोसाइटी, ट्रस्ट अथवा क्लब को दी जा सकती है। इसके लिए उनके कार्य व अनुभव भी देखें जाएंगे। नागरिकों की मांग पर तत्काल शव परिवहन की सेवा दी जाएगी।
खास-खास
निशुल्क होगी शव परिवहन सेवा
सरकारी वाहन से ही ढोएं जाएंगे लावारिस शव
अपर मुख्य चिकित्साधिकारी होंगे नोडल अधिकारी
जनपद से बाहर लाश ले जाने के लिए डीएम देंगे परमिशन