राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना की समूह सखी डाली ने 50 समूहों का गठन कर 400 महिलाओं को रोजगार जोड़ प्रेरणादायी काम किया है। घर बैठी महिलाएं अब भैंस पालन, ई-रिक्शा संचालन, कॉस्मेटिक की दुकान और ब्यूटी पार्लर का काम कर कमाई रही हैं।
सिराथू विकासखंड के रामपुर धमावां गांव की डाली बीए की पढ़ाई पूरी कर बेरोजगार थीं। पांच साल पहले राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़कर लक्ष्मी माता महिला स्वयं सहायता समूह बनाया और सदस्यों के साथ अचार मुरब्बा बनाने का काम शुरू किया।
रोजगार शुरू होने के बाद उन्हें आजीविका मिशन में समूह सखी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद आसपास के छह गांवों में योजना के प्रति बेरोजगार महिलाओं को जागरूक कर शीतला माता, शारदा माता, नारायण, विवेकानंद, बाबा साहब, भोले बाबा, साईं राम सहित 50 समूहों का गठन किया। रोजगार शुरू कराने के लिए बैंकों से मिलीं।
मदद के बाद विश्वास स्वयं सहायता समूह की सचिव माया देवी भैंस पालन कर दुग्ध का व्यवसाय कर रही हैं। नारायण महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य रुक्मणी देवी कृषि सखी वन लोगों को खेती किसानी के बारे में जानकारी देकर जागरूक बना रही हैं।
वर्जन
रामपुर धमावां गांव की डाली ने कम उम्र में राष्ट्रीय आजीविका मिशन में जुड़कर खुद रोजगार की शुरुआत की और महिलाओं को भी जोड़ा है। सबसे अधिक 50 समूह का गठन कर महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
- महेंद्र कुमार, सहायक विकास अधिकारी, आईएसबी।