एक ग्राहक को पीतल की कढ़ाई दिखाता दुकानदार। संवाद
आधुनिक दौर में स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन भले ही घरों में दिखते हों लेकिन अब लोग इनसे दूरी बनाने लगे हैं। इस बार दीपावली और धनतेरस पर लोगों का रुझान एक बार फिर पारंपरिक फूल (तांबा) और पीतल के बर्तनों की ओर बढ़ा है। कारोबारियों के अनुसार इसबार इन बर्तनों की बिक्री में 40 से 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।
स्टील और एल्युमिनियम के बर्तन का सेहत पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। जबकि फूल और पीतल के बर्तन स्वास्थ्य के लिए बेहतर मानें जाते हैं। वैज्ञानिक व चिकित्सक भी इसकी सलाह देते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने तो एल्युमिनियम के बर्तन पर खाना बनाने को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। ऐसे में अब लोग पारंपरिक बर्तनों की ओर बढ़ने लगे हैं।
बढ़ती मांग का असर कीमतों पर भी दिखा है। पिछले वर्ष जहां पीतल के पुराने बर्तन 450 रुपये प्रति किलो खरीदे जाते थे। इस बार कीमत बढ़कर 550 रुपये किलो तक पहुंच गई है। यानी एक साल में लगभग 100 रुपये किलो की वृद्धि हुई है। नए बर्तनों में भी खूब खरीदारी हुई। इस वर्ष पीतल 700 रुपये किलो तो फूल के बर्तन 1050 रुपये किलो तक बिके।
कारोबारियों का कहना है कि रोजमर्रा प्रयोग में आने वाले बर्तनों की सबसे अधिक मांग रही। इसमें लोटा, थाली, गिलास और कटोरा प्रमुख हैं। दुकान संचालक राजू कसेरा, मनीराम कसेरा और रविशंकर कसेरा बताते हैं कि इस बार त्योहार पर ग्राहकों की भीड़ लगातार बनी रही। काफी समय के बाद फूल-पीतल के बाजार में ऐसी रौनक देखने को मिली। ऐसे में कारोबारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इनकी मांग और अधिक बढ़ेगी।