तीन दिन की छुट्टी के बाद मेडिकल कॉलेज का अस्पताल खुला तो ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। सामान्य दिनों में जहां रोजाना 1000 से 1200 मरीज इलाज के लिए आते हैं, वहीं सोमवार को 2119 मरीजों ने उपचार कराया। सुबह से लेकर दोपहर तक ओपीडी कक्ष के बाहर में बैठने की जगह तक नहीं बची।
ज्यादातर मरीज खांसी, जुकाम, बुखार और वायरल संक्रमण से पीड़ित थे। बदलते मौसम के चलते पहले ही बड़ी संख्या में लोग इन बीमारियों से परेशान थे लेकिन लगातार तीन दिन अस्पताल बंद रहने के कारण मरीजों की संख्या बढ़ गई। जैसे ही अस्पताल खुला पंजीकरण काउंटर पर भीड़ जमा हो गई। बाल रोग विभाग में सबसे ज्यादा खांसी-जुकाम और बुखार से पीड़ित छोटे बच्चों को परिजन लेकर पहुंचे। मेडिसिन और ईएनटी विभागों में भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मरीज आए।
ओपीडी तक जाने वाली गैलरी में भीड़
ओपीडी तक जाने वाली गैलरी खचाखच भर गई। डॉक्टर तक पहुंचने के लिए मरीजों को धक्कामुक्की झेलनी पड़ी। भेलखा के राजू और पतौना के वीरेंद्र ने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। भीड़ इतनी है कि आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
पेड़ की छांव बनी सहारा
भीड़ होने के कारण मजबूरी में लोग अस्पताल के बाहर पेड़ों की छांव में बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। करारी के अमन और मंझनपुर के दीपू, विकास, अनिल, सीमा देवी व रोमी ने बताया कि सुबह से ही लंबी लाइन लगी है। मरीजों ने कहा कि निजी डॉक्टरों के यहां महंगा इलाज कराने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली इसलिए जैसे ही सरकारी अस्पताल खुला, वे दौड़ पड़े। कुछ ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वे निजी चिकित्सकों के पास नहीं गए। अस्पताल खुलने का इंतजार कर रहे थे।
मां को गोद में लेकर पहुंचा बेटा
भीड़ में एक बेटा अपनी बीमार मां को गोद में उठाकर ओपीडी तक पहुंचा। स्ट्रेचर या व्हीलचेयर का इंतजाम कर पाना मुश्किल हो गया था। नाम न छापने की शर्त पर तीमारदार ने बताया कि उनकी मां कई दिनों से बीमार थीं लेकिन अस्पताल बंद होने के कारण इलाज नहीं हो सका। सोमवार को अस्पताल खुलते ही वे सुबह-सुबह पहुंचे मगर वहां गैलरी और ओपीडी में मरीजों की भीड देखकर परेशान हो गए।
तीन दिन बाद अस्पताल खुलने से मरीजों की संख्या सामान्य से दोगुनी हो गई। भीड़ को देखते हुए डॉक्टरों ने अतिरिक्त समय तक ओपीडी में सेवाएं दीं।
- डॉ. एसके शुक्ला, सीएमएस