करारी थाना क्षेत्र के पचम्भा गांव में सोमवार रात दो सगे भाइयों की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। बहन की हालत गंभीर है, उसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। सभी ने भोजन के नाम पर शाम को सिर्फ भुना चावल खाया था। डॉक्टर मौत की वजह फूड प्वायजनिंग नहीं मान रहे हैं।
पचम्भा निवासी हरिश्चंद्र मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। सोमवार की रात उसके बेटे मंजीत कुमार (11), रंजीत कुमार (04), संदीप कुमार (02) और बेटी सावित्री (06) ने गांव में लाई-चना भूनने वाले से चावल भुनवाया था। इसके बाद सभी लोगों ने मिलकर खाया और पानी पीकर सो गए। रात करीब 11 बजे रंजीत, संदीप और सावित्री की हालत बिगड़ गई। इनको उल्टी व दस्त होने लगे। इससे हरिश्चंद्र व उसकी पत्नी अनीता देवी के होश उड़ गए।
वह आनन-फानन में बच्चों को लेकर करारी अस्पताल पहुंचे। जहां रंजीत को मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद वह संदीप को लेकर जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल आए। यहां इलाज के दौरान रात करीब एक बजे उसकी भी मौत हो गई। सावित्री की भी हालत खराब है। उसका करारी के एक निजी अस्पताल में इलाज हो रहा है। चौथे बच्चे की हालत ठीक है। दो बेटों की मौत से हरिश्चंद्र के घर में कोहराम मचा हुआ है। बच्चों की मौत कैसे हुई। इसके कारणों का पता डॉक्टर नहीं लगा सके हैं। हालांकि डॉक्टरों ने इसे फूड प्वायजनिंग मानने से इंकार कर दिया है। मंगलवार की शाम को सगे भाईयों के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
क्या कहते हैं डॉक्टर
जिला अस्पताल में फिजीशियन डॉक्टर अरविंद कनौजिया का कहना है कि भुने गए खाद्य पदार्थ से फूड प्वायजनिंग नहीं हो सकती है। बच्चों को क्या बीमारी हुई है, इसकी जानकारी तभी होगी जब बच्चों की जांच कराई जाए।