नेवादा। अमरूद की बाग में बने बागवान के छप्पर में बुधवार की रात अचानक आग लग गई। इससे छप्पर के साथ ही नगदी समेत बागवान की सारी गृहस्थी जलकर खाक हो गई। साथ ही लपटों की चपेट में आने से करीब 20 पेड़ अमरूद के भी जल गए हैं। चीख-पुकार और उठती लपटें देख दौड़े गांववालों ने घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया। आग कैसे लगी। यह बागवान नहीं बता पा रहा है। आशंका है कि खाना बनाने के बाद आग ठीक से नहीं बुझाने से यह हादसा हुआ है।
सरायअकिल कोतवाली क्षेत्र के बिन्नई गांव निवासी सुन्ने अमरूद का कारोबारी है। प्रतिवर्ष वह किसानों से उनकी अमरूद की बाग खरीदता है। इस साल भी उसने चिरारी गांव के चंद्रभूषण सिंह की एक बीघा अमरूद की बाग खरीदी है। सुन्ने ने बताया कि वहीं बाग में ही तीन झोपड़े बनाकर वह मां, पत्नी और तीन बच्चों के साथ रहता भी है। उसका कहना है कि बुधवार की रात उसने 35 हजार रुपये का अमरूद बेचा था।
वह पैसा भी उसके पास था। रात में करीब 10 बजे खाना खाने के बाद पूरा परिवार सो गया था। इसके करीब घंटेभर बाद अचानक उसके झोपड़े में आग लग गई। लपटों की तपिश से नीद टूटने पर मां, बीवी और बच्चों को लेकर वह झोपड़े से निकलकर चीखने-चिल्लाने लगा। चीख-पुकार और बाग से उठती लपटें देख गांववाले दौड़े। ग्रामीणों ने आकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। करीब दो घंटे की मेहनत के बाद गांववाले आग पर काबू पा सके। हालांकि जब तक आग बुझाई जाती। उसके तीनों छप्पर जल गए थे।
साथ ही छप्पर में रखा 35 हजार रुपये के अलावा बिस्तर, कपड़े, बर्तन और दो बोरी गेहूं, एक बोरी चावल समेत गृहस्थी का सारा सामान भी लपटों की भेंट चढ़ चुका था। भुक्तभोगी के मुताबिक आग लगने से उसे करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है।