मंझनपुर। वासंतिक नवरात्र की नवमी पर्व पर जजौली गांव में साधु के कथित अग्निस्नान के दौरान दरोगा पर हुए हमले के दौरान भाग निकले तीन पुलिसकर्मियों को एसपी ने सस्पेंड कर दिया है। इनमें एक दरोगा और 2 सिपाही शामिल हैं। एसपी की इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
बता दें कि पश्चिमशरीरा कोतवाली क्षेत्र के जजौली गांव निवासी रामबाबू सरोज ने 28 मार्च को वह नवरात्र की पूजा के बाद अग्नि स्नान का ऐलान किया था। नवमी पर्व पर उसने अग्निस्नान की पूरी तैयार कर ली थी। इसकी भनक लगते ही पश्चिमशरीरा कोतवाली के दरोगा नयन सिंह, दरोगा मोहम्मद यासीन, सिपाही दुर्गेश पांडेय और सुभाष चंद्र यादव मौके पर पहुंचे। साधु को अग्नि स्नान करने से रोकने की कोशिश पर साधु, उसके शिष्यों और ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर कातिलाना हमला कर दिया।
नयन सिंह को बेरहमी से पीटने के बाद हमलावरों ने उनकी सर्विस रिवाल्वर भी छीन ली। उधर, साथी दरोगा का पिटता देख उसके साथ मौजूद दरोगा मोहम्मद यासीन, सिपाही दुर्गेश और सुभाष भाग निकले। दरोगा को मौत के मुंह में छोड़कर पुलिसकर्मियों के भाग निकलने के मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने सीओ सिटी को प्रकरण की जांच का निर्देश दिया था। सीओ की जांच रिपोर्ट के बाद बुधवार की रात एसपी रतनकांत पांडेय ने भगोडे़ दरोगा और सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया। एसपी की इस कार्रवाई से पुलिस महकमें में हड़कंप मचा हुआ है।
जजौली गांव में नवरात्र नवमी पर साधु के अग्नि समाधि लेने की जानकारी होने के बाद भी स्टेशन अफसर मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। सूचना मिली थी तो पहले भी पंचायत कर मामले को रफा-दफा कराया जा सकता है। वहीं चर्चा है कि अभिसूचना इकाई ने घटना के तीन दिन पहले ही सूचना पुलिस अफसरों को दे दी थी। सब कुछ जानने के बाद दरोगा की जान जोखिम में डालने वाले थानेदार पर यह कैसी मेहरबानी है।न