जिले में अगलगी की लगातार घटनाएं हो रही हैं। तीन दिन के भीतर 50 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं। अधिकांश घटनाएं बिजली के जर्जर तार टूटने से हुई हैं। चरवा के टाटा गांव में खेत बचाने के चक्कर में किसान रामचंद्र जिंदा जल गया। अग्निकांड का शिकार हुए पीड़ित किसानों को मुआवजा देने की पहल फिलहाल कागजी है। सीएम योगी का भी खौफ अधिकारियों में नहीं है। सात अप्रैल को सीएम ने फरमान जारी किया था कि यदि बिजली के तार टूटने से फसलें जलती हैं तो उनका मुआवजा सात दिन के भीतर दिया जाए, नहीं तो डीएम नपेंगे। योगी इस चेतावनी में डीएम फंस गए हैं। सात दिन के भीतर डीएम अग्नि पीड़ितों को मुआवजा दिलाएंगे या फिर कार्रवाई का सामना करेंगे, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं।
रविवार को तीनों तहसील क्षेत्रों में आग लगने से दो घर समेत कई बीघा फसल जलकर राख हो गई थी। आधा दर्जन से ज्यादा घटनाएं हुई थीं। इसके अलावा चरवा के टाटा गांव में किसान रामचंद्र गुप्ता की खेत बचाने के चक्कर में करंट लगने से मौत हो गई थी। शमसाबाद कें डिंचा पर, पतौना, इछना, नौबस्ता में कई बीघें की फसल जली। किसानों की आंख के सामने उनकी खड़ी फसल स्वाहा हो गई। कई गांवों में तो राजस्व विभाग के कर्मचारी पहुंचे ही नहीं। इससे नुकसान की रिपोर्ट एसडीएम को नहीं मिली। इन परिस्थितियों में डीएम अग्निकांड के पीड़ितों को सात दिन के भीतर मुआवजा कैसे दिलाएंगे, इसको लेकर अभी से प्रश्न चिह्न उठने लगा है। बिजली के तार टूटने से जली फसलों का मुआवजा तहसील प्रशासन द्वारा सात दिन के भीतर किसान के खाते में भेजना है। तहसील कर्मचारियों की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक उन्होंने अग्निकांड के पीड़ितों के खेतों का मुआयना ही नहीं किया। नौबस्ता के मुन्ना पांडेय का ढाई बीघा खेत रविवार को जला है। सोमवार तक राजस्व कर्मी नहीं पहुंचे थे, ऐसे में रिपोर्ट कैसे बनेगी और कब मुआवजा मिलेगा, अंदाजा ही लगाया जा सकता है।
बिजली विभाग से मुआवजा लेने की जटिल है प्रक्रिया
बिजली विभाग से मुआवजा लेना आसान काम नहीं है। विभाग ने इतनी टेढ़ी प्रक्रिया बना रखी है कि किसान उसमें उलझकर रह गया है। विद्युत सुरक्षा इकाई के साथ ही राजस्व विभाग की रिपोर्ट लगने के बाद विभाग मुआवजा देता है। इसके लिए किसानों को काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे। सोमवार को कई किसानों ने प्रक्रिया पूछी तो उनके पसीने छूट गए।
बिजली के जर्जर तार टूटकर खेतों में गिर रहे हैं। इससे खड़ी फसलें धू-धू कर जल रही हैं। तीन दिन के भीतर 60 बीघा से ज्यादा फसल जल गई। बिजली के तार टूटने से होने वाले हादसों पर विभाग मुआवजा देता है। विभाग से मुआवजा हासिल करने के लिए सोमवार को कई किसान डिवीजन दफ्तर पहुंचे तो, जानकारी हासिल की तो उनके होश उड़ गए। फसल जलने पर मुआवजे के लिए विभाग में आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद विभाग इसकी जानकारी विद्युत सुरक्षा इकाई को देता है। विद्युत सुरक्षा इकाई का दफ्तर इलाहाबाद में है। वहां से टीम आती है।
टीम स्थानीय लाइनमैन व जेई के साथ सर्वे करती है। सर्वे करने के बाद वह केवल यह प्रमाणित करती है कि विद्युत तार टूटने से ही किसान की फसल जली। इसके बाद विभाग इसकी रिपोर्ट डीएम को भेजता है। डीएम तहसील प्रशासन से जांच कराते हैं। तहसीलदार व राजस्व कर्मी फसल के हुए नुकसान की क्षति की रिपोर्ट देते हैं। राजस्व कर्मी ही तय करते हैं कि किसान को कितना मुआवजा दिया जाना है। इसके बाद पत्रावली अधीक्षण अभियंता (एसी) को भेजी जाती है। अधीक्षण अभियंता ही अनुदान देने की स्वीकृति देते हैं। बिजली के तार टूटने से होने वाले हादसे में यदि किसी की मौत हो जाती है तो यही प्रक्रिया मुआवजे के लिए अपनाई जाती है। मौत होने पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट देना अनिवार्य होता है। इस जटिल प्रक्रिया का सामना करने से लोग कतरा रहे हैं। किसान कितने दफ्तरों का चक्कर लगाएगा। जितना मुआवजा नहीं मिलना है, उससे ज्यादा किसानों का किराया-भाड़ा ही खर्च हो जाएगा।