होली और सहालग के चलते दूध व दुग्ध उत्पाद की मांग बढ़ गई है। खपत और उत्पादन के बीच पैदा हुई खाई से मुनाफा काटने को मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। जिले की प्रमुख मंडियों में नकली खोवे की भरमार है। कमोबेश यही हाल पनीर का भी है। विभागीय लापरवाही का फायदा उठाकर गोरखधंधे में शामिल तमाम कारोबारी लोगों की आंख में धूल झोककर मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसे में जरा सी चूक त्योहार में लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
होली के त्योहार में गुझिया बनाने के लिए घर-घर खोवे की डिमांड है। साथ-साथ सहालग भी चल रही है। इसके चलते खोवा और पनीर की खपत बढ़ गई है। उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठाने के लिए नकली खोवा बनाने और बेचने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। जिले की मनौरी, चरवा और भरवारी की मंडी में इन दिनों पहुंचने वाले अधिकतर खोवे की गुणवत्ता सामान्य दिनों के मुकाबले काफी हल्की है। नाम न छापने की शर्त में चरवा इलाके के एक खोवा व्यापारी ने बताया कि सामान्य दिनों में जिले की प्रमुख बाजारों में रोजाना 5-6 क्विंटल खपने वाले खोवे की डिमांड इस वक्त 10-12 क्विंटल तक पहुंच गई है।
उत्पादन और खपत के बीच पैदा हुई खाई को भरने के लिए कृत्रिम (नकली) खोवा की सप्लाई का खेल जोरों पर है। मंझनपुर के डेयरी संचालक राम उदित यादव का कहना है कि ऐसा ही कुछ हाल पनीर का भी है। पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिलने की वजह से मिल्क पाउडर अथवा केमिकल का इस्तेमाल कर पनीर तैयार की जा रही है। दूसरी तरफ खाद्य विभाग के अफसर इससे बेखबर हैं। वह बड़ों पर हाथ डालने के बजाय छोटे-छोटे परचून अथवा मिठाई की दुकानों से नमूने भरकर त्योहारी अभियान की औपचारिकता निभा रहे हैं। अफसरों की इस बेपरवाही का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।
कौशाम्बी से दिल्ली और कोलकाता तक की सप्लाई
कौशाम्बी में तैयार खोवे की आपूर्ति देश की राजधानी दिल्ली और कोलकाता तक की जाती है। पड़ोसी जनपद फतेहपुर निवासी एक कारोबारी ने जिले की देवीगंज बाजार में खोवा बनाने का काराखाना खोल रखा है। स्थानीय मंडी में सप्लाई नहीं होने के कारण इस कारोबारी को लोकल स्तर पर कम ही लोग जाते हैं। पर, केमिकल युक्त खोवा बनाकर बेचने वाले इस कारोबारी से खाद्य विभाग के अफसर अच्छी तरह से वाकिफ हैं।
ऐसे तैयार होता है नकली खोवा
आलू अथवा शकरकंद को उबालने के बाद कद्दूकस में घिसकर मैदा और स्टार्च मिलाया जाता है। सफाई के लिए हाइड्रोजन पैराक्साइड डाला जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिककारक है। इसके अलावा केमिकल युक्त मिल्क पाउडर से भी खोवा बनाया जाता है। केमिकल युक्त इस खोवे से तैयार सामग्री सेहत के लिए काफी नुकसानदायक होता है।
आंत,फेफड़े, पेट और गले में इंफेक्शन का खतरा
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ दीपक सेठ का कहना है कि केमिकल युक्त मिलावटी खोवे के इस्तेमाल से आंत, पेट और गले में इन्फेक्शन हो जाता है। होली के त्योहार में मिलावटी खाद्य सामग्री के प्रयोग से डायरिया की भी समस्या हो सकती है।
ऐसे करें मिलावट की पहचान
जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक वसीम अहमद का कहना है कि मिलावटी खोवा पहचाने की घरेलू विधि बहुत कारगर नहीं है। घर पर केवल स्वाद और खुश्बू से ही प्रारंभिक तौर पर पहचान की जा सकती है। इसके अलावा खोवा उबालकर ठंडा करने के बाद टिंचर आयोडीन की दो-तीन बूंद डालने पर खोवे का रंग नीला होने पर मिलावट तय माना जाए।