लाखों की पगार उठाने के बावजूद डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं। इसके चलते तमाम कवायद के बावजूद गरीबों को सरकारी स्वास्थ्य सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका नमूना बृहस्पतिवार को अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहजादपुर में दिखा। यहां बलगम की जांच करने वाला कर्मचारी ही मरीजों का इलाज करता है। अब तो इलाकाई ग्रामीण उसे ही डॉक्टर मानने लगे हैं।
सिराथू ब्लॉक क्षेत्र के कमासिन, सयांरा, गनपा और शहजादपुर समेत आसपास के दो दर्जन गांव के गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शहजादपुर उपकेंद्र खोला गया है। यहां इसके लिए एमओआईसी डॉ हासिम खान, डॉ प्रतिभा गुप्ता, कुष्ठ रोग के मरीजों के इलाज के लिए नान मेडिको असिस्टेंट (एनएमए) अशोक कुमार, फार्मासिस्ट लल्लू प्रसाद, जगजीत सिंह, स्टॉफ नर्स विमला देवी, बलगम जांच करने के लिए (एसएम) रामराज, स्वीपर सुरेश कुमार समेत आठ कर्मियों की तैनाती है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला टीम की पड़ताल में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से बदहाल दिखी।
सुबह 8.10 बजे पहुंची टीम की मुलाकात बलगम जांच करने वाले अकेले रामराज से हुई। बताया कि वह सरकारी आवास में रहता है। रोजाना सुबह अस्पताल खोलने के बाद मरीजों की दवा इलाज करता है। घंटे भर के इंतजार के बावजूद कोई डॉक्टर या कर्मचारी नहीं पहुंच सका था। जबकि अलग-अलग गांवों के पिल्थी, राहुल, कृष्ण, संदीप राजेश कुमार, रोहित, कलावती, सविता, मैकू समेत नौ मरीज पहुंच चुके थे। एमओआईसी डॉ हासिम खान तकरीबन दस बजे अस्पताल पहुंचे । बताया कि उन्होंने 48 घंटे की इमरजेंसी ड्यूटी की थी, इसलिए आने में देरी हो गई। यहां तैनात महिला चिकित्सक प्रतिभा गुप्ता के बारे में मौजूद मरीजों को पता ही नहीं है। बताया गया कि वह कभी ड्यूटी पर आती ही नहीं हैं। अब तक स्वीपर भी आ चुका था। इसके बाद परिसर की साफ-सफाई शुरू हुई। इन सभी अव्यवस्थाओं के चलते ग्रामीणों को अस्पताल के जरिए अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही है। नतीजतन दिन भर में महज 25-30 मरीज ही इलाज कराने आते हैं।
आवास है पर रहता कोई नहीं
अस्पताल परिसर में डॉक्टर से लेकर कर्मचारियों तक के लिए आवासीय सुविधा है। इसके बावजूद एक कर्मचारी के अलावा यहां कोई नहीं ठहरता है। इसके चलते आवास बदहाल होते जा रहे हैं। परिसर में लगा हैंडंपप खारा पानी दे रहा है। पत्राचार के बावजूद समस्या का निस्तारण नहीं हो सका।
सीएचसी इस्माइलपुर में दस दिन जिला जेल और पोस्टमार्टम हाउस में दो-दो दिन की ड्यूटी होने के कारण महीने के आधे दिन अस्पताल नहीं आ पाता हूं। इस वजह से कुछ दिक्कते हैं। बाकी कर्मचारी समय से क्यों नहीं आए? इसके लिए संबंधितों से जवाब-तलब किया जाएगा।
डॉ हासिम खान, एमओआईसी