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बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए चार बच्चे

Sun, 24 Jul 2016 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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राजस्थान में बंधुआ मजदूर के रूप में काम कर रहे चार नाबालिग बच्चों को ऑपरेशन मुस्कान के तहत राजस्थान पुलिस की मदद से मुक्त कराया गया। राजस्थान के चूड़ी कारखाने से पुलिस ने बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर शनिवार की सुबह कौशाम्बी लाया गया। साथ आए सुरक्षा गार्डों ने किशोरों को कौशाम्बी बाल कल्याण समिति के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर किशोरों के परिजन बाल कल्याण समिति कार्यालय अपने बच्चों को लेने पहुंच गए।
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कौशाम्बी थाने के लोधपुरवा निवासी लवकुश (10), अमर सिंह (11) पुत्रगण बेनी, कुलदीप (12) पुत्र अमर सिंह और सराय अकिल थाने के फजुल्लापुर निवासी नीरज (11) पुत्र शिवभान राजस्थान के पाली जिला स्थित एक चूड़ी फैक्ट्री में दो माह से बंधुआ मजदूर थे। दो माह पहले इन्हें करारी थाने के रक्सवारा निवासी अलताफ और कौशाम्बी थाने के दुल्हनियापुर निवासी खालिक नौकरी दिलाने के बहाने साथ ले गए थे। आरोप है कि दोनो ने इन किशोरों को पाली जिले के एक चूड़ी फैक्ट्री मालिक के हवाले कर दिया और गायब हो गए।

इसके बाद फैक्ट्री मालिक इन किशोरों को आधा पेट भोजन देकर हाड़तोड़ काम ले रहा था। कोई आगे-पीछे न होने की वजह से चारों बालक फैक्ट्री मालिक के इशारे पर काम करने को मजबूर थे। इसकी भनक पाली जिले के बाल श्रम कल्याण बोर्ड के अधिकारी को हुई। उसने आपरेशन मुस्कान के तहत इलाकाई पुलिस की मदद से छापेमारी की। फैक्ट्री में चारों किशोरों से पूछताछ की गई तो बंधुआ मजदूरी का खुलासा हुआ। आरोपी फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लिखापढ़ी करते हुए चारों बच्चों को कस्टडी में ले लिया गया।
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जानकारी पाली एसपी को हुई तो उन्होंने सिपाही श्रवण कुमार, जोधाराम, महिपाल सिंह, ओम प्रकाश, सुनील कुमार की सुरक्षा में चारों को कौशाम्बी भेजा। पांचों सिपाही चारों किशोरों को लेकर सीधे कौशाम्बी थाने पहुंचे। वहां से इन्हें मंझनपुर स्थित बाल कल्याण समिति पहुंचाया गया। जानकारी मिलने पर चारों किशोरों के परिजन उन्हें लेने के लिए बाल कल्याण समिति पहुंच गए।

काम न करने पर फैक्ट्री मालिक करता था मारपीट
 पाली जिले के चूड़ी कारखाने में दो माह से आधे पेट भोजन पर काम करते-करते चारों बाल श्रमिक ऊब चुके थे। ऐसे में कभी-कभी यह काम करने से आनाकानी करते थे। ऐसा करने पर इन बाल श्रमिकों के साथ फैक्ट्री मालिक बुरा बर्ताव करता था। बाल कल्याण समिति लाए गए किशोरों की माने तो भरपेट भोजन मांगने और भूखे पेट काम न करने पर उन्हें आए दिन मारा-पीटा जाता था। भय वश उन्हें मजबूरी में काम करना पड़ता था।

एसपी की पत्नी ने दिए कपड़े और खाना
 चूड़ी फैक्ट्री में बंधुआ मजदूरी से मुक्त हुए लवकुश, अमर सिंह, नीरज और कुलदीप को राजस्थान के पुलिस अधीक्षक दीपक भार्गव के पास ले जाया गया। कार्यालय में न होने की वजह से बाल मजदूरों को एसपी से उनके आवास पर मिलाया गया। बच्चों की दुर्दशा को देख एसपी की पत्नी को तरस आया। उन्होंने चारों बाल श्रमिकों को पहले भरपेट भोजन कराया। इसके बाद नए कपड़े मंगवाकर पहनने को दिया। एसपी ने चारो किशोरों को पांच सिपाहियों की सुरक्षा में रास्ते का खर्च देकर कौशाम्बी भेजवाया।

पाली जिले से बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराकर चार बच्चे लाए गए हैं। इनके परिजनों का सत्यापन कराया जा रहा है। सोमवार को सत्यापन आने के बाद बच्चों को उनके परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा।
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डॉ. मधु चावला, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
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