इंसाफ का पहला घर आम आदमी के लिए थाना व चौकी ही होता है। इस भरोसे को तोड़ते हुए कानून के ही रखवालों ने सोमवार को छेड़खानी के बाद महिला का मान रखने के बजाय चौकी में उसका तमाशा बना दिया था। दरिंदे प्रेम साहू को छोड़ने के लिए पुलिस ने चौकी में हर वह हथकंडा अपनाया जो कानून की किताब व पुलिस मैनुअल के हिसाब से नाजायज था। महिला कार्रवाई कराने की जिद पर अड़ी थी, लेकिन पुलिस ने उसे डांट-डपटकर खामोश कराया। पति व भाई ने विरोध किया तो उनको भी पुलिस ने अपने तरीके से खामोश कर दिया था। इस खौफनाक वारदात के लिए जितना दरिंदे प्रेम साहू व उसके साथी कसूरवार हैं, उससे कहीं ज्यादा कोखराज पुलिस भी गुनहगार है।
कोखराज थानान्तर्गत एक गांव में रविवार को प्रेम साहू ने महिला के साथ छेड़खानी की थी। प्रेम साहू के इस दुस्साहस पर महिला ने उसको पहले झाड़ू से पीटा। इसके बाद सोमवार को कोखराज थाना की मूरतगंज चौकी पुलिस को तहरीर दी। चौकी प्रभारी राकेश शर्मा के निर्देश पर कांस्टेबल शत्रुघ्न शुक्ला प्रेम साहू को पकड़कर चौकी लाए। महिला का पति भाई वहां बैठे थे। दोपहर बाद चौकी में पंचायत शुरू हुई। तमाम कवायद के बाद पुलिस ने वादिनी की बातों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। कांस्टेबिल शत्रुघ्न शुक्ला व एक दिव्यांग होमगार्ड प्रेम साहू के पक्ष में उतर आए। बातचीत के दौरान ही महिला कार्रवाई की जिद पर अड़ गई थी। पति व उसके भाई भी रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। इसी बीच पुलिस ने पैंतरा बदला। प्रेम साहू के बचाव में उतरी पुलिस ने महिला के पति व भाई को ही बात-बात पर डांटना शुरू कर दिया।
हालांकि इस दौरान भाई ने जबर्दस्त विरोध किया था, लेकिन आवाज चौकी से बाहर नहीं निकल सकी। प्रेम साहू व पुलिस अपने मकसद में कामयाब रही और मामले का निपटारा करके वादिनी और आरोपी दोनों को भेज दिया गया। दरिंदे पर पुलिस की यह मेहरबानी महिला की जान पर आफत बनकर टूटी। प्रेम साहू ने अपहरण करने के बाद उसके साथ दुराचार किया। उसके साथियों ने भी दरिंदगी की। राजफाश न होने पाए, इसलिए उसका बेरहमी से कत्ल कर दिया। उसे निर्वस्त्र छोड़कर आरोपी फरार हो गए। घटना की यह सच्चाई पुलिस अफसरों के पहुंचने पर पति व भाई ने खोली तो लोगों के होश उड़ गए, लेकिन पुलिस कार्रवाई के नाम पर अपनों का ही बचाव करती रही। इस मामले में पुलिस भी कम जिम्मेदार नहीं है। न वो कांस्टेबिल शैलेंद्र शुक्ल जो प्रेम साहू को पकड़कर लाया था, न ही मूरतगंज चौकी प्रभारी राकेश शर्मा, जिनकी मौजूदगी में पंचायत हुई। अवकाश प्राप्त मुंशी की जगह लेने वाला एक सिपाही भी इसका मूक गवाह है। इस नाइंसाफी के लिए मुंशी की कुर्सी पर बैठने वाले सिपाही की भी जवाबदेही बनती है कि आखिर ऐसा क्यों पुलिस ने किया? सीओ सिराथू अंशुमान मिश्र का कहना है कि आरोपों की क्या हकीकत है, इसकी जांच की जाएगी। यदि ऐसा हुआ है तो कोई बख्शा नहीं जाएगा।
चौकी पुलिस ने बनाया पीड़िता को अबला
गैंगरेप के बाद मौत के घाट उतारी गई विवाहिता शेरनी थी, उसे तो अबला चौकी पुलिस ने बना दिया था। आबरू कैसे बचाई जाती है, उसे पता था, इसके लिए वह जान भी दे सकती थी। यही उसने रविवार को किया था। प्र्रेम साहू ने उसकी इज्जत पर हाथ डालने की कोशिश की तो उसे झाड़ू से पीटा था। ये बात यहीं नहीं खत्म हुई थी। वह बाकायदा अपने पति व भाई के साथ चौकी में कार्रवाई के लिए गई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि यहां उसकी सुनी नहीं जाएगी और दूसरे दिन वह बोलने के लिए जिंदा नहीं रहेगी।
विवाहिता के साथ जो सलूक हुआ है, उसे लोग सालों याद रखेंगे। गांव के मनचले युवक ने विवाहिता की आबरू से खेलने की तो उसकी सरेआम पिटाई की। इसके बाद वह किसी और के साथ इस तरह का दुस्साहस न करें, इस उम्मीद में वह मूरतगंज चौकी पुलिस गई थी। इंसाफ की आस में उसे दुत्कार मिली। या यूं कहें कि गांव में जो हुआ, उससे ज्यादा उसे चौकी में शर्मसार होना पड़ा। उसकी मौजूदगी में ही पूरे मामले को रफादफा कर दिया गया। पुलिस कर्मियों की पंचायत के बाद आरोपी प्रेम साहू को छोड़ दिया गया। इसके बाद भी विवाहिता का साहस कम नहीं हुआ था। वह पुलिस अधिकारियों से दुहाई देने की तैयारी कर रही थी। विवाहिता अपनी जंग जीतती इसके पहले ही उसको मौत के घाट उतार दिया गया। वह भी इस तरीके से की कोई विवाहिता अब इस तरह का कदम न उठा सके। प्रेम साहू व उसके साथी दुराचार के बाद विवाहिता की हत्या कर फरार हो गए हैं। अब पुलिस उनको ढूंढ़ रही है। इसके लिए कई टीमें सक्रिय हैं।