नैनी शूट आउट के दूसरे दिन झूंसी के शेरडीह में हुए बवाल में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। मामले की जांच डीआईजी ने एसपी कौशाम्बी वीके मिश्र को सौंपी है। मामले में एसपी ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को बयान दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा है लेकिन कोई भी अधिकारी बयान दर्ज कराने कौशाम्बी नहीं पहुंचा। इससे घटना को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों की संजीदगी का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इलाहाबाद में केंद्रीय कारागार नैनी के बाहर पांच जून को पिता चंद्रभान यादव से मुलाकात कर घर लौट रहे ज्ञानचंद्र यादव उर्फ वकील व उसके साथ रहे लोगों पर गोली व बम से हमला किया गया था। घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। हत्याकांड को लेकर बवाल की पूरी आशंका थी लेकिन पुलिस के अधिकारियों ने संजीदगी नहीं दिखाई। बवाल हुआ तो उसमें कई पुलिस अधिकारी और कर्मी घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर पहुंची डीआईजी जितेंद्र कुमार शाही को पुलिस की लापरवाही दिखी।
इस पर उन्होंने कौशाम्बी एसपी वीके मिश्र को लापरवाही उजागर करने की जांच सौंप दी। मामले में एसपी ने बयान दर्ज कराने के लिए एसपी गंगापार राजेश श्रीवास्तव, एसपी क्राइम रमाकांत प्रसाद, सीओ फूलपुर एमपी सलोनिया, सीओ हंडिया राजवीर सिंह, सीओ सोरांव लाल प्रताप सिंह और सीओ मेजा जितेंद्र दुबे को पत्र भेजकर मामले में बयान दर्ज कराने को कहा। पुलिस के इन अधिकारियों को बयान दर्ज कराने के लिए तीन जुलाई को आना था लेकिन छह जुलाई तक एक भी अधिकारी बयान दर्ज कराने एसपी कौशाम्बी कार्यालय नहीं पहुंच सका।
शेरडीह बवाल को लेकर पुलिस अफसरों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अफसरों को पत्र भेजा गया है। अभी तक किसी ने अपना बयान नहीं दर्ज कराया है।
वीके मिश्र, एसपी कौशाम्बी