दहेज की खातिर विवाहिता को मौत की नींद सुलाने वाले पति को दस साल और सास-ससुर को सात-सास साल कैद की सजा बृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाई। तीन नामजद अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक इलाहाबाद के इन्द्रनगर पंतरवा धूमनगंज निवासी मगन लाल पुत्र विशंभर ने पुत्री शिल्पी केशरवानी की शादी 15 फरवरी 2014 को मंझनपुर के गल्लामंडी नेहरूनगर निवासी राकेश कुमार पुत्र पितंबर लाल से की थी। शादी के बाद से ही शिल्पी को कम दहेज लाने का ताना मिलने लगा। 23 अगस्त की रात शिल्पी को इस कदर पीटा गया कि सुबह होते-होते उसकी सांसें थम गईं।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए भुक्तभोगी पिता की तहरीर पर हत्यारोपी पति राकेश केशरवानी, ससुर पितंबर लाल, सास आशा देवी समेत छह लोगों पर मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामला अपर सत्र न्यायाधीश फास्टट्रैक प्रथम दिनेश पाल यादव की अदालत में चला। बृहस्पतिवार को शासकीय अधिवक्ता अब्दुल लतीफ और बचाव पक्ष के अधिवक्ता को सुनने के बाद अदालत ने पति राकेश को दस और सास-ससुर को सात-सात कैद की सजा सुनाई। साथ ही 15-15 हजार रुपए अर्थदंड भी वसूलने का आदेश दिया।