जिले भर की भांग की दुकानों की नीलामी में आबकारी आयुक्त ने जमकर खेल किया। हॉल टिकट के सहारे आबकारी अधिकारी ने बोली लगाने वाले एक भी निविदादाता को हॉल में नहीं घुसने दिया। बंद कमरे में चंद चहेतों को बुलाकर जिले भर की 42 दुकानों को महज एक लाख की राजस्व वृद्धि के साथ आवंटित कर दिया। यह आरोप बोली हॉल में घुसने से वंचित रह गए निविदादाताओं ने आबकारी आयुक्त को फैक्स भेजकर लगाया है।
कौशाम्बी में भांग की 42 दुकानों की बोली में पिछले साल से खेल हो रहा है। वर्ष 2016-17 के लिए हुई दुकानों की नीलामी सांठगांठ के सहारे एक व्यक्ति को दे दी गई थी। इस साल भी आबकारी अधिकारी पर उसी का सिक्का चला। 28 दिसंबर बुधवार को कलक्ट्रेट में बोली लगाने के लिए डीओ आबकारी ने चंद चहेतों को हाल टिकट जारी कर बोली का कोरम पूरा करा लिया। बाकी के 25-30 आवेदकों को बोली हाल में हॉल टिकट न होने के बहाने घुसने पर रोक लगा दी गई। चहेतों को जिले भर की दुकानें दिए जाने के लिए आबकारी अधिकारी ने मंगलवार की शाम ही खेल कर लिया था। हॉल टिकट बनवाए गए चहेतों को तो जारी कर दिया बाकी के लोगों को बुधवार की सुबह देने की बात कहकर वापस कर दिया था। बुधवार की सुबह जब बोली लगाने वालों को अंदर नहीं घुसने दिया गया और दुकान की नीलामी कर दी गई तो दंग रह गए। बोली हॉल में न घुस पाने वाले आवेदक मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से करते रहे पर हुआ वही जो आबकारी अधिकारी और उसके चहेतों ने चाहा। अंत में कोरम पूरा कर सभी 42 दुकानों की नीलामी चंद रुपए बढ़ाकर चहेतों को दे दी गई।
इन लोगों को नहीं दिया गया था हॉल टिकट
बुधवार को भांग की दुकान की नीलामी में शामिल होने के आवेदन करने वालों में 25 लोगों का हाल टिकट नहीं जारी हो सका था। इसमें राजेश कुमार, देवेंद्र कुमार, राम कुमार, हीरालाल, राजबीर, दिलीप कुमार, कामता प्रसाद केसरवानी, बुधई, संतोष कुमार त्रिपाठी, राहुल कुमार केसरवानी, धर्मेंद्र शुक्ल, राम विशाल यादव, अशोक पांडेय, असमन यादव, प्रेम, राजदेव आदि शामिल हैं।
दुकानों की नीलामी आबकारी लाइसेंस टेंडर व नीलामी 1991 के अन्तर्गत कराई गई है। हॉल टिकट के लिए मंगलवार को बुलाया गया था। जो लोग आए थे उन्हें हॉल टिकट आवंटित किया गया है।
बीपी मनिक, डीओ आबकारी