जिला जेल में सोमवार की सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में वृद्ध कैदी देशराज की मौत हो गई। बंदियों के शोर मचाने पर आरक्षी भागकर आए और जेलर को सूचना दी। वृद्ध को लेकर आरक्षी जिला अस्पताल लाए, जहां उसे मृत घोषित किया गया। वृद्ध हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा था। सदर कोतवाली पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पिता की मौत की खबर मीडिया कर्मियों से बेटे को मिली तो वह जेल प्रशासन पर भड़क गया। सूचना न देने से नाराज बेटे ने शव लेने से इंकार कर दिया था। पुलिस के समझाने पर बेटा किसी तरह राजी हुआ।
सदर कोतवाली क्षेत्र के भगतन का पुरवा निवासी देशराज (70) ने 30 साल पहले गौसपुर टिकरी के सरधुवा लोध की हत्या कर दी थी। मामला कोर्ट में चल रहा था। वर्ष 2015 में अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो देशराज व हत्या में शामिल रहे उसके साथी रामलखन उर्फ लल्लू और बच्चन माली को पुलिस ने जेल भेज दिया था। जिला कारागार में देशराज व उसके साथी बैरक दो-ए में बंद थे। सोमवार की सुबह करीब आठ बजे बंदी व कैदियों की गिनती हुई। गिनती के बाद सभी को बैरक में डाला गया। इसी दौरान देशराज की बैरक के भीतर बैठे-बैठे ही मौत हो गई। साथियों को इसका पता चला तो उन्होंने शोर मचाया। आरक्षी भागकर आए।
वृद्ध की मौत होने की की जानकारी जेलर आरके सिंह को दी। जेलर के निर्देश पर बंदी रक्षक वृद्ध को लेकर जिला अस्पताल आए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जेल प्रशासन कीओर से इसकी सूचना देशराज के परिजनों को नहीं दी गई थी। मीडिया कर्मी देशराज के घर गए तो बड़ा बेटा मोतीलाल अपने काम में मशगूल था। वह पिता की मौत से बेखबर था। मीडिया कर्मियाें ने मौत की जानकारी दी तो वह दहाड़े मारकर रो पड़ा। सूचना न देने से नाराज मोतीलाल ने शव लेने से इंकार कर दिया था। वृद्ध के शव को सदर कोतवाली पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
कैदी देशराज वृद्ध था। सुबह गिनती के बाद वह बैरक में बैठा था। इसी दौरान उसकी तबियत बिगड़ी। बेसुध हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया था, अस्पताल में उसे मृत घोषित किया गया। वृद्ध की मौत स्वाभाविक है।
आरके सिंह, जेलर