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फरार डिप्टी जेलर का तीन दिन बाद भी नहीं लगा सुराग

Wed, 06 Jul 2016 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
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जिला जेल में तैनात डिप्टी जेलर मुकदमा दर्ज होने के बाद से जिले से गायब है। उनकी गिरफ्तारी के लिए दो टीमें पुलिस अधीक्षक ने गठित कर रखी हैं लेकिन अब तक डिप्टी जेलर का सुराग नहीं लगा सका है। उधर, आरोपी डिप्टी जेलर चुपके से न्यायालय में हाजिर होने की फिराक में है।
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जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय को इलाज के बहाने उसके घर ले जाने के मामले में डिप्टी जेलर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फरार कैदी की गिरफ्तारी के बाद हुए बयान में उनकी संलिप्तता पाई गई। कैदी के बयान को आधार मानते हुए एसपी ने डिप्टी जेलर डीके सिंह और जेल में बंद कैदी सुशील मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी को लेकर एसपी ने सदर कोतवाली पुलिस और एसओजी की दो टीम गठित कर दिया है।

उधर मुकदमा दर्ज होने की जानकारी होते ही डिप्टी जेलर जिले की सीमा से बाहर हो गए हैं। रविवार को टीम का गठन होने के बाद से दोनाें टीमों के प्रभारी फरार डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी को लेकर हवा में तीर चला रहे हैं। टीमें आरोपी की गिरफ्तारी तो दूर उनका ठिकाने का सुराग नहीं लगा सकी हैं। सूत्रों की माने तो फरार डिप्टी जेलर गिरफ्तारी के लिए गठित टीमों को चकमा देकर न्यायालय में सरेंडर करने की फिराक में है। अब देखना यह है कि फरार डिप्टी जेलर को गिरफ्तार करने में एसपी की टीम को सफलता मिलती है या फिर आरोपी टीम को चकमा देकर स्वयं न्यायालय में हाजिर हो जाएंगे।
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 जिला जेल में बंद कैदी दीपक पांडेय को इलाज के बहाने उसके घर ले जाया गया था। इस रहस्य से पर्दा उठाने के बाद एसपी वीके मिश्र ने डिप्टी जेलर डीके सिंह के खिलाफ साजिश का मुकदमा लिखवा दिया। इतना ही नहीं उनकी गिरफ्तारी के लिए सदर कोतवाली पुलिस व एसओजी प्रभारी की टीम गठित कर दिया। इसकी जानकारी जिला जेल में मौजूद डिप्टी जेलर के गुर्गों को हुई तो उनमें हड़कंप मच गया है। उन्हें भी इस बात का भय सताने लगा है कि कहीं जांच की आंच उन तक भी न पहुंच जाए। इससे लेकर जेल के अंदर से बाहर तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।

 जिला जेल में डिप्टी जेलर का पूरा गैंग चलता था। इसी गैंग के सहारे डिप्टी जेलर बंद कैदियों को सारी सुविधाएं मुहैया कराता था। सूत्रों की माने तो यदि अधीक्षक अथवा जेलर द्वारा कैदियों को सुविधाएं मुहैया कराने के बावत कभी भी कड़ाई करने का प्रयास किया जाता था तो डिप्टी जेलर जेल के अंदर कैदियों से बवाल करा देता था। उसके इशारे पर कैदी न केवल बवाल करते थेे, बल्कि भोजन न करना, जीभ काट डालना, बंदी रक्षकों से अभद्रता तक करते थे। इतना ही नहीं कैदियों को सुविधा मुहैया कराने के नाम पर डिप्टी जेलर और उनके गुर्गे खासी वसूली भी करते थे। बहरहाल डिप्टी जेलर पर मुकदमा लिखे जाने के बाद अब उनका तिलिस्म टूटता दिख रहा है। धीरे-धीरे उनके गुर्गे भी सरेंडर हो रहे हैं।

डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी है। संदिग्ध ठिकानों पर मुखबिरों का जाल बिछाया गया है। जैसे ही ठोस सुबूत मिलेगा दबिश देकर उन्हें दबोच लिया जाएगा।
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विपिन त्रिवेदी, एसओजी प्रभारी
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