गंगा के कछार अफजलपुर सातों गांव में रविवार को बारहसिंघा घुस आया था। वह प्यास से तड़प रहा था। ग्रामीणों ने उसे जीवित रखने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन वन विभाग की लापरवाही ने उसकी जान ले ली। वन विभाग के कर्मी समय से नहीं पहुंचे। इलाज न होने से उसकी मौत हो गई। इस प्रजाति के जानवर तेजी से लुप्त हो रहे हैं। इसके बाद भी वन विभाग संजीदा नहीं था।
अफजलपुर सातों गांव में जंगल से निकलकर एक बारहसिंघा घुस आया था। ग्रामीणों ने सींग वाले हिरण को देखा तो घेरकर पकड़ लिया। बारहसिंघा प्यास से बेकल था। ग्रामीणों ने उसे पानी पिलाया और हरा चारा दिया। इसके बाद वन विभाग के कर्मियों को सूचना दी। वन विभाग के कर्मी समय से वहां नहीं पहुंचे। पशु चिकित्सक भी गायब रहे। भीषण गर्मी की वजह से बारहसिंघा की रविवार रात मौत हो गई। इसकी जानकारी वन विभाग कर्मियों को सुबह मिली तो वे गांव पहुंचे।
शव सुबह अस्पताल ले गए और पोस्टमार्टम कराया। डीएफओ ओपी अम्बस्ट का कहना है कि जिस जानवर की मौत हुई है वह चीतर है। उसकी मौत स्वाभाविक है। कौशाम्बी में इस प्रजाति के वन्य जीव नहीं है। प्रतापगढ़ के जंगलों से भटक कर यहां हिरण व अन्य प्रजातियों के जानवर आ जाते हैं। डीएफओ के इस दावे से तराई के लोग सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि आए दिन जंगलों में हिरण देखे जाते हैं। इनकी तलाश में शिकारी घूमते रहते हैं।