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फसल तबाही पर दो और किसानों की मौत

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चायल/चरवा (कौशाम्बी)। मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल के सदमे में किसानों की मौत लगातार जारी है। शनिवार को भी सदमे में कौशाम्बी के दो और किसानों की सांसें थम गईं। इसमें पुरामुफ्ती के काजीपुर गांव के किसान अर्जुन सिंह (40) भी शामिल है। उसके डेढ़ बीघे खेत में एक बोरा गेहूं निकला था। यह देख उसे हार्टअटैक हो गया। वहीं शुक्रवार की देर रात चरवा के पन्नोई गांव के किसान बचईलाल (70) की भी मौत हो गई। घरवालों के मुताबिक शुक्रवार की शाम वह खेत देखने गया था। लौटने के बाद उसके सीने में दर्द होने लगा था। बर्बाद फसले के सदमे में कौशाम्बी में अब तक तीन किसानों की जान जा चुकी है।
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कौशाम्बी के पुरामुफ्ती कोतवाली क्षेत्र के काजीपुर गांव निवासी अर्जुन (40) पुत्र छोटेलाल की मौत हो गई है। छोटा भाई ईंट भट्ठे पर काम करता है। विकलांग होने के कारण वह मां के साथ घर में रहकर खेती करता था। उसके पास सिर्फ 10 बिस्वा खेत है। इसके अलावा उसने एक काश्तकार का एक बीघा खेत बंटाई पर लिया था। मां राजकुमारी ने बताया कि शुक्रवार की रात पूरे डेढ़ बीघा खेत में बोई गई गेहूं की फसल की मड़ाई कराई गई थी। इसमें सिर्फ एक कुंतल अनाज पैदा हुआ है। यह देख अर्जुन परेशान हो उठा।

मां के मुताबित फसल की ऐसी बर्बादी देख उसने रात में खाना भी नहीं खाया था। सुबह उठा तो उसके सीने में दर्द होने लगा था। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। उधर, चरवा कोतवाली के पन्नोई गांव निवासी बचईलाल (70) की भी शुक्रवार की रात करीब दो बजे सांसें थम गई। घरवालों के मुताबिक बचईलाल की शाम को वह घूमते-घूमते खेत की ओर चले गए थे। लौटने के बाद उन्होंने भी सीने में दर्द होने की शिकायत घरवालों से की थी। देर रात अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी और देखते ही देखते सांसें थम गई।
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लोग बताते हैं कि पिछले साल भी उनकी खेती खराब हो गई थी। इधर, फरवरी में अपने दूसरे नंबर के बेटे की शादी की थी। इसके लिए कर्ज लेना पड़ा था। सोचा था कि गेहूं बेचकर कर्ज चुकता कर देंगे। पर, मौसम की मार से फसल बर्बाद हुई देख उनका दिल बैठ गया था। मामले में एसडीएम चायल रजनीश मिश्र ने बताया कि लेखपाल और राजस्व निरीक्षक को काजीपुर गांव भेजकर मौत की पड़ताल कराई गई है। दोनों की मौत सदमे से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है।
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