फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गम-गुस्से में डूबा दिखा भगवतपुर

Sat, 14 Mar 2015 11:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन
चायल (ब्यूरो)। पूर्व प्रधान के इकलौते बेटे की हत्या के गम और गुस्से में शनिवार को पूरा भगवतपुर डूबा रहा। दोपहर बाद जैसे ही शव लेकर पुलिस आई। मां, बाप और बहनें दहाड़े मार-मारकर रोने लगीं। जवान बेटे और भाई की मौत पर घरवालों की चित्कार से पूरा गांव दहल उठा। दुख-दर्द के इस असहनीय मंजर को देखते हुए पुलिस ने शव को वाहन से नीचे नहीं उतारा। परिजनों को आदित्य के चेहरे की एक झलक दिखाकर उसे अंतिम संस्कार के लिए भेज दिया गया।
विज्ञापन


बता दें कि भगवतपुर गांव के रहने वाले पूर्व प्रधान शिवशंकर सिंह के पांच बच्चे हैं। इनमें आदित्य तीसरे नंबर पर था। दो बड़ी बहनें रिंकी और पिंकी की शादी हो चुकी है, जबकि अर्चना और कुमकुम उससे छोटी थीं। चार बहनों के बीच अकेले भाई आदित्य जहां अपनी सभी बहनों का लाडला था। वहीं इकलौते होने के कारण मां-बाप का भी दुलारा था। बच्चों के साथ राजी-खुशी रहने वाले शिवशंकर और जयश्री के हंसते-खेलते कुनबे को जाने किसी नजर लग गई। मामूली सी बात को लेकर तीन महीने पहले हुई कहासुनी की रंजिश में शुक्रवार को उसे बेरहम हत्यारों से गोलियों से छलनी कर दिया। मौत पर पूरा परिवार 24 घंटे से आंसू बहा रहा है।

मां जयश्री तो जवान बेटे की मौत की खबर से पूरी रात बेसुध पड़ी रही। वहीं शनिवार की दोपहर बाद जैसे ही शव आया। मां-बहन और पिता दहाड़े मार-मारकर रो पड़े। मां-बहनों की हालत देख उन्हें ढांढस बंधाने वाली महिलाएं भी अपने आंसू नहीं रोक पा रही थी। शव आने की खबर लगते ही जुटी हजारों की भीड़ की भी आंखें इस मंजर से नम बनी रही।
विज्ञापन


 भगवतपुर गांव के पूर्व प्रधान के बेटे की हत्या पर शुक्रवार को पूरा गांव आपे से बाहर हो गया था। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने इलाहाबाद-करारी मार्ग पर चक्काजाम करके जमकर तोड़फोड़ की थी। ग्रामीणों का यह गुस्सा घंटों की मशक्कत के बाद किसी तरह से अफसरों ने काबू में किया था। वहीं अफसरों में आशंका बनी थी कि शव आने के बाद परिजन और गांववालों का गुस्सा फिर से फूट सकता है।

इसके मद्देनजर सुबह से ही एएसपी ओपी पांडेय, सीओ चायल आलोक कुमार के साथ ही पिपरी, पुरामुफ्ती, चरवा, सरायअकिल आदि थानों की फोर्स के साथ पीएसी के जवानों को गांव में तैनात कर दिया गया था। इतनी फोर्स को ड्यूटी पर लगाने के बाद भी पुलिस ने शव को वाहन से उतारने की हिम्मत नहीं दिखा सकी। परिजनों को आदित्य का चेहरा एक बार दिखाने के बाद पुलिस ने परिजन, रिश्तेदारों को समझाकर आनन-फानन में उसका अंतिम संस्कार कराने में ही अपनी भलाई समझी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें