अवैध खनन की जांच करने आई सीबीआई टीम के लौटते ही बालू माफिया खनन दफ्तर में सक्रिय होने लगे हैं। खनन माफिया ने अवैध खनन के जरिए डंप की गई बालू को प्रपत्र सी के सहारे बेचने की कवायद शुरू कर दिया है। इसके लिए खनन कार्यालय में आवेदन का दौर शुरू हो गया है।
दोआबा में अक्टूबर 2015 से सिंडीकेट का डेरा रहा। जिले में आने के बाद सिंडीकेट ने चल रहे पट्टों पर अपनी व्यवस्था लागू कर दिया। इस दौरान कुछ पट्टेधारकों ने सिंडीकेट की व्यवस्था अपना लिया तो कुछ विरोध करते रहे लेकिन जब सिंडीकेट पूरी तरह से हावी हो गया तो पट्टाधारकों ने मजबूरी में सिंडीकेट की शर्त को मानते हुए खनन शुरू करा दिया। अप्रैल माह में जिले में चल रहे पट्टों की अवधि समाप्त हो गई थी। इसके बाद सिंडीकेट ने जिले के अलावा गैर जनपद के कारोबारियों से मोटी रकम लेकर उन्हें अवैध खनन के लिए घाट सौंप दिया। मई के महीने में घाटों पर बालू खनन के लिए जेसीबी गरजती रही।
इस बीच अवैध खनन की खबरें अखबार की सुर्खियां बनीं तो डीएम अखंड प्रताप सिंह, एसपी वीके मिश्र ने रात-रात भर छापेमारी कर विभिन्न थानों में 58 ट्रकें सीज की। इस दौरान उन्हें घाटों पर जेसीबी और पोकलैंड नहीं मिल सकी लेकिन प्रशासन इस बात को जान गया था कि जिले में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। इस दौरान बालू माफिया ने घाटों से लेकर आस-पास के गांवों में बगैर परमीशन के भारी मात्रा में अवैध बालू डंप कर लिया। मामले में उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच गठित कर दिया। 11 अगस्त को जिले में सीबीआई टीम आई तो बालू माफिया को सांप सूंघ गया। वह गाड़ियां और मोबाइल नंबर बदलकर सीबीआई की गतिविधि का जायजा लेते रहे लेकिन टीम के जाते ही कारोबारी एक बार फिर से खनन कार्यालय में सक्रिय हो गए हैं।
वह अवैध खनन के जरिए निकालकर डंप की गई बालू को बेंचकर मोटी रकम जुटाने में लग गए हैं। उन्हें इस बात का तनिक भी खौफ नहीं है कि सीबीआई ने एक-एक जगह पर डंप बालू को चिह्नित कर फोटोग्राफी करा लिया है। दूसरी ओर डंप के वैध लाइसेंसी भी बालू बेचने के लिए खनिज कार्यालय में आवेदन करने लगे हैं। जबकि खनन अधिकारी डंप बालू के परिवहन के लिए दिए जाने वाले प्रपत्र सी को जारी करने को लेकर ऊहापोह की स्थिति में हैं। मामले में खनन अधिकारी अरविंद कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है।