सितंबर माह में जिले के विभिन्न स्थानों पर सीबीआई द्वारा सीज की गई बालू को टीम के वापस जाते ही कारोबारियों ने औने-पौने दामों में बेच डाला था। अब रोक हटी है तो कारोबारियों में सीबीआई के आने का खौफ दिखने लगा है। सीबीआई के फिर आने की भनक लगते ही कारोबारियों ने मुख्यालय आना बंद कर दिया है। उधर रात के अंधेरे में बालू बिकवाने वाले इलाकाई थानाध्यक्ष चिंतित दिखने लगे हैं।
जिले में आए कथित सिंडीकेट ने स्थानीय कारोबारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम दिया। जिले के महेवाघाट, जमुनापुर, कटरी, डेढ़ावल, पभोषा, महिला, भकंदा, कटैया, महरनिया, ब्यूर, असरावल आदि यमुना घाटों पर भारी संख्या में अवैध खनन की बालू कारोबारियों ने डंप कर रखी थी। पीआईएल के बाद न्यायालय के आदेश पर सीबीआई ने सितंबर माह में जिले में दस्तक दी। पहली मर्तबा आई टीम ने 11 दिन तक रहकर जिले के एक-एक बालू घाट का निरीक्षण कर अवैध डंप बालू को सीज कर खनन अधिकारी और संबंधित पुलिस के हवाले कर दिया।
इसके बाद दोबारा आई टीम ने कारोबारियों को बुलाकर उनसे गहराई से पूछताछ कर रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए न्यायालय को सौंप दिया। मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच पर ब्रेक लगा दिया गया था। इसके बाद कारोबारियों ने सीज अवैध बालू को बेचने की होड़ लगा दी। बगैर रवन्ने के कारोबारियों ने करोड़ों की बालू बेंचकर मोटी रकम वसूल किया। इस कारोबार में इलाकाई पुलिस ने भी कारोबारियों का भरपूर सहयोग किया। तीन दिन पहले न्यायालय ने सीबीआई जांच पर लगी रोक हटाई तो कारोबारियों के पैरो तले से जमीन खिसक गई।
बालू बिकने से खनन विभाग के कर्मी भी परेशान
सीबीआई ने अवैध बालू सीज कराकर खनन विभाग के हवाले कर दिया था। खनन विभाग को इस बालू की निगरानी करनी थी, इस ओर खनन विभाग की निगाह नहीं रही। रात-दिन अवैध तरीके से सीज की गई बालू को कारोबारियों ने बेच दिया। चोरी छिपे हुआ यह खेल खनन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के गले की फांस बन गया है।