टेंवा (कौशाम्बी)। बेमौसम की बारिश से बर्बाद हुए किसानों पर अब आग का कहर टूटने लगा है। सोमवार की रात बरैसा गांव के एक किसान का मड़ाई के लिए रखी 150 बोझ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। संदिग्धदशा में लगी आग बुझाने में घंटे भर तक ग्रामीण और दमकलकर्मी जूझते रहे। इससे पहले सोमवार को दिन में भी सिराथू और चायल में लगी आग से सैकड़ों बोझ गेहूं की फसल स्वाहा हो गई थी।
मार्च-अप्रैल में तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसम की बारिश में जिले के सभी किसानों की गेहूं समेत ज्यादातर फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। मौसम की मार से बची-खुची फसलों पर अब आग का कहर शुरू हो गया है। सोमवार की रात भी पश्चिमशरीरा कोतवाली क्षेत्र के बरैसा गांव निवासी किशनपाल सिंह की फसल लपटों की भेंट चढ़ गई। किशनपाल ने बताया कि करीब दो बीघे की फसल काटकर मड़ाई के लिए बोझ बनाकर खेत में ही रखी गई थी। सोमवार की रात करीब 10 बजे अचानक फसलों में आग लग गई। खेत से उठती लपटें देख गांव में हड़कंप मच गया। चीखते-चिल्लाते गांववाले जुट गए। आसमान चूमती लपटें देख ग्रामीण घबरा गए।
तत्काल ग्रामीणों ने पश्चिमशरीरा पुलिस और दमकल को घटना की जानकारी दी। साथ ही लोग खुद भी आग बुझाने में जुटे। सूचना पर इलाकाई पुलिस के साथ दमकलकर्मी भी मौके पर पहुंचे। करीब घंटेभर तक जूझने के बाद ग्रामीण और दमकलकर्मियों ने मिलकर आग पर काबू पाया। हालांकि जब तक आग बुझ पाती। किशनपाल की 150 बोझ गेहूं की फसल स्वाहा हो चुकी थी। आग लगने की इस घटना से किशनपाल का पूरा परिवार परेशान है। उसने बचाया कि मौसम की मार से वैसे ही आधी से अधिक पैदावार प्रभावित हो गई थी। बची-खुची फसल आग की भेंट चढ़ गई। सुबह लेखपाल ने आकर नुकसान का जायजा लिया। साथ ही रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजने की बात कही है। बता दें कि मौसम की मार से कराह रहे किसानों को अब आग तबाह कर रही है। सोमवार को दिन में भी सिराथू के दिलावलपुर गांव की कमला देवी की 100 बोझ गेहूं की फसल जल गई थी। वहीं चायल क्षेत्र के असरावल कला गांव के किसान मजीब उल्ला के भी दो बीघे खेत की फसल स्वाहा हो गई थी।