मास्टर जी डकार गए विद्यालय का पांच लाख
शौचालय, किचन शेड व चहारदीवारी के लिए आया था रुपया
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिला मुख्यालय से सटे गड़रियन का पुरवा प्राथमिक विद्यालय की बदहाली की ओर अधिकारियों की निगाह नहीं जा रही है। शौचालय, किचन शेड व चहारदीवारी के लिए पांच साल पहले पांच लाख आया था। जिसे हेडमास्टर ने पूर्व प्रधान की मिलीभगत से हजम कर लिया। तमाम शिकायत के बाद वेतन रोकने की कार्रवाई, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया।
गड़रियन का पुरवा प्राथमिक विद्यालय में 91 छात्रों का पंजीकरण हैं। विद्यालय में न तो चहारदीवारी है, न ही शौचालय है। एमडीएम के लिए किचन शेड भी नहीं है। शौचालय न होने से छात्र व छात्राओं को शौचालय के लिए खुले में जाना पड़ता है। वर्ष 2012 में किचन शेड, चहारदीवारी और शौचालय के लिए पांच लाख रुपया विद्यालय प्रबंधन समिति को दिया गया। इस रकम से एक रुपये का काम नहीं कराया गया है। हेड मास्टर धर्मेंद्र द्विवेदी और पूर्व प्रधान ने मिलकर रकम का बंदरबांट कर लिया। विद्यालय के कमरों तक में मवेशी पहुंच जाते हैं। वहीं यहां पढ़ाने वाले तीन शिक्षक भी शौचालय न चहारदीवारी न होने से परेशान हैं। शिक्षक भी अव्यवस्था को लेकर खफा हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शिकायत पर दो बार बीएसए ने वेतन रोका, इसके बाद भी निर्माण नहीं कराया गया। इतना ही नहीं हेड मास्टर ने अपना वेतन भी बहाल करवा लिया।
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हलफनामा देकर बीएसए को दिया झांसा
निर्माण कार्य न कराने पर तत्कालीन बीएसए दलश्रृंगार यादव ने हेड मास्टर धर्मेंद्र द्विवेदी का वेतन रोक दिया था। इससे हेड मास्टर छटपटाने लगा था। महीनों वेतन रुका रहने के बाद हेड मास्टर ने तत्कालीन बीएसए को झांसा देते हुए एक हलफनामा दिया कि वह वेतन बहाल कर दें। वेतन बहाल होते ही वह निर्माण करा देगा। वेतन तो बहाल हो गई, लेकिन निर्माण कार्य नहीं कराया गया।
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‘निर्माण क्यों नहीं कराया गया है, इसकी जांच करवाई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में हेडमास्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और वहां निर्माण कराया जाएगा।’
महराज स्वामी, बीएसए