पश्चिमशरीरा । भीषण सड़क हादसे के बाद मोर्चरी में जबर्दस्त अव्यवस्था देखने को मिली। मोबाइल व टॉर्च की रोशनी में मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम किया गया। यहां कॉटन तक का इंतजाम नहीं था। इसे लेकर मौके पर पहुंचे सदर विधायक ने नाराजगी जाहिर की। तब जाकर व्यवस्थाएं दुरुस्त की गईं।
रक्सराई सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए लोगों की लाश शाम करीब चार बजे मोर्चरी भेज दी गई थीं। तकरीबन दो घंटे पुलिस को शिनाख्त और पंचनामा करने में लग गया। इसके बाद जब पोस्टमार्टम की बारी आई तो कमरे में अंधेरा हो चुका था। पोस्टमार्टम हाउस का ट्रांसफार्मर 25 दिन से फुंका हुआ है। लिहाजा बिजली नहीं थी। डॉक्टरों ने मोबाइल की टार्च की रोशनी में पोस्टमार्टम किया। यहां कॉटन भी नहीं था। इस बीच अव्यवस्था की जानकारी पाकर सदर विधायक लाल बहादुर मौके पर पहुंच गए। उन्होंने सीएमओ को फोन करके नाराजगी जाहिर की। इसके बाद सीएमओ अपनी सरकारी गाड़ी से कॉटन लेकर पहुंचे। डीएम ने आननफानन बिजली कर्मचारियों को भेजकर पास स्थित स्टेडियम से पीएम हाउस में लाइट का इंतजाम कराया।
सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए एक व्यक्ति की शिनाख्त देर शाम तक नहीं हो सकी। इसे लेकर पुलिस खासी परेशान रही। शव किसका है ? यह एक अनसुलझा सवाल बना रहा। अज्ञात शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ है। पुलिस के मुताबिक शिनाख्त के बाद ही पोस्टमार्टम हो सकता है। पश्चिमशरीरा कोतवाली क्षेत्र के रामआधीन का पूरा गांव का मोतीलाल पुत्र छेदीलाल रिश्ते में दूल्हे का बहनोई लगता था। शनिवार को वह बरात जाने के लिए तैयार हुआ तो नाती राजन और साजन भी साथ चलने की जिद करने लगे। काफी समझाने के बाद भी दोनों नहीं माने। अंत में परिजनों ने हार मान ली और बच्चों को बरात भेज दिया। बालकों की इसी जिद ने उनके परिवार को दोहरा झटका दिया। रविवार सुबह रक्सराई के पास हुए भीषण सड़क हादसे में राजन और उसके बाबा मोतीलाल की मृत्यु हो गई। घटना से पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है। राजन का पिता जमशेर अपने मृत बाप और बेटे की लाश से लिपटकर रो रहा था। परिवार के अन्य सदस्यों का भी यही हाल था।
गोराजू गांव के गुलशन को रोजगार के लिए दिलाई गई बोलेरो उसका काल बन गई। इसी बोलेरो को बारात में बुक कर वह रक्सराई तक पहुंच गया और हादसे का शिकार हो गया। पश्चिमशरीरा कोतवाली क्षेत्र के गोराजू गांव का गुलशन पांच भाइयों में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई रिजवान और फुरकान पिता के साथ मुंबई में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं। इमरान व रहमान घर पर रहकर खेती का काम देखते हैं। गुलशन के पास कोई काम नहीं था। दो महीने पहले उसका पिता मुंबई से घर आया तो उसने गुलशन को किराए पर चलाने के लिए एक बोलेरो दिला दी। पिता ने सोचा कि छोटे बेटे के हाथ में ड्राइवरी का हुनर है तो इसी के सहारे वह दो पैरे कमाएगा। उस पिता को क्या पता था कि रोजगार के लिए दिलाई गई गाड़ी ही बेटे को मौत तक घसीट ले जाएगी।
सरायअकिल कोतवाली क्षेत्र के रक्सराई गांव में रविवार सुबह हुए सड़क हादसे में जिले के छह गांवों के लोग मौत का शिकार हुए। इन गांवों के ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई तो वह स्तब्ध रह गए। कोई आननफानन घटनास्थल भागा तो कोई अस्पताल पहुंच गया। जिला अस्पताल से लेकर मोर्चरी तक देर रात तक भीड़ देखने को मिली। तमाम ग्रामीणों के घरों में चूल्हे नहीं जले। लोग मृतकों के परिजनों को ढाढ़स बंधाने के लिए उनके घर पर भी जमा रहे। रात को मौत का शिकार हुए लोगों की लाशें पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंची तो कोहराम मच गया। परिवार वाले शव देखते ही दहाड़े मारकर रो पड़े। घटना के बाद वर पक्ष के लोग खुद को कोसते रहे। दूल्हा खुद भी अस्पताल और फिर मोर्चरी पहुंच गया। उसका उसके पिता सुरेश व परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। यह लोग खुद को ही कोस रहे थे। कह रहे थे न जाने किस मुहूर्त में कार्यक्रम हुआ। पता होता तो किसी को बरात ही नहीं ले जाते। रिश्तेदार होनी का वास्ता देकर इन्हें ढाढ़स बंधाते रहे।