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मासूम बेटे संग ट्रेन के सामने कूदा युवक , मौत

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मासूम बेटे संग ट्रेन के सामने कूदा युवक , मौत
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-पत्नी से कहासुनी होने पर पिता ने बेटे के साथ उठाया आत्मघाती कदम
-शुक्रवार की सुबह रोही क्रासिंग के समीप हुआ हादसा, परिजनों में कोहराम
अमर उजाला ब्यूरो
भरवारी (कौशाम्बी)। दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग कोखराज के रोही क्रासिंग के समीप शुक्रवार सुबह मासूम बेटे के साथ युवक ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। हादसा देख मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौजूद लोगों से शवों की पहचान कराकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पिता-पुत्र की मौत से परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है।
कोखराज थाना क्षेत्र के खल्लाबाद का देवराज (40) पुत्र ईश्वरदीन कपडे की सिलाई करता था। दो साल पहले पत्नी शकुंतला देवी की बीमारी से मौत हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद वह बेटे दिव्यांशु (10) और हिमांशु (07) के साथ रहता था। बच्चों की परवरिश के लिए आठ महीने पहले उसने चकिया गांव की शांती देवी से दूसरी शादी कर ली। तीन महीने से बच्चों को लेकर अक्सर पति-पत्नी के बीच तू-तू, मैं-मैं होने लगी। शुक्रवार की सुबह भी दोनों के बीच बच्चों को लेकर विवाद हो गया। पत्नी से झगड़ने के बाद देवराज सात वर्षीय बेटे हिमांशु को लेकर खेत जाने के बहाने घर से निकला। रोही क्रासिंग के समीप कानपुर की ओर से आ रही ट्रेन के सामने बेटे के साथ छलांग लगा दी। ट्रेन की चपेट में आने से दोनों के चीथड़े उड़ गए। हादसा देख मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना पर पहुंची भरवारी चौकी पुलिस ने मौजूद लोगों से शव की पहचान कराने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मासूम बच्चे के साथ युवक की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है।
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शांति के आते ही देवराज के घर फैली अशांति
-दूसरी बीवी के ताने से आजिज आकर उठाया आत्मघाती कदम
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
शकुंतला की मौत के बाद शांति के घर पर कदम रखते ही देवराज के घर अशांति फैल गई। दो मासूम बेटों की खातिर उसे इस कदर प्रताड़ित कर दिया गया कि वह खुदकुशी करने के लिए मजबूर हो गया, और शुक्रवार सुबह मासूम बेटे के साथ मौत को गले लगा लिया।
खल्लाबाद का देवराज दो भाईयों में सबसे छोटा था। पत्नी शकुंतला और बेटे दिव्यांशु और हिमांशु के साथ वह हंसी-खुशी से रहता था। दो साल पहले लंबी बीमारी के बाद शकुंतला की मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद देवराज दोनों बेटों की परवरिश में जुट गया। उसके पास कमाई का एक मात्र साधन था कपड़े की सिलाई का। सुबह जाने के बाद वह देर शाम घर लौटता था। इस दौरान उसे बच्चों की परवरिश में कमी दिखने लगी। परिजनों के कहने के बाद उसने शादी करने का मन बना लिया। आठ महीने पहले देवराज ने इलाहाबाद चकिया की शांती देवी से शादी कर लिया। शांती के घर आते ही घर का माहौल बिगड़ने लगा। आए दिन बच्चों को लेकर शंाती देवराज से लड़ने-झगड़ने लगी। आए दिन बच्चों को घर के भीतर मारपीट करना, भगाना आदत बन गई। पत्नी की यह बात देवराज को अखरने लगी। रोज-रोज के ताने से आजिज आने के बाद देवराज ने शुक्रवार को छोटे बेटे हिमांशु के साथ मौत को गले लगाने का फैसला किया। इसके बाद रोही के समीप ट्रेन के सामने छलांग लगाकर जान दे दी।
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छह महीने पहले दिव्यांशु का पालनहार बना ताऊ
भाई के घर बच्चों को लेकर विवाद को देखते हुए देवराज के बड़े भाई रामराज ने दिव्यांशु को अपने पास रख लिया और उसकी परिवरिश करने लगा। इसके बाद भी शांति का गुस्सा शांत नहीं हुआ। देवराज का आत्मघाती कदम देख बूढ़ी मां के साथ घर के लोग अवाक रह गए।
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अकेले स्वतंत्रराज करना चाहती थी शांति
देवराज की दूसरी बीवी शांती देवी घर पर अकेले राज करना चाहती थी। कई बार उसने देवराज से बेटों को अलग करने की जिद भी की थी पर देवराज बेटों की मोहब्बत के आगे बेबस था। पत्नी की लाश कोशिश के बाद भी उसने ऐसा नहीं किया। जिसे लेकर विवाद बढ़ता गया और देवराज ने बेटे के साथ मौत की नींद सो गया।
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शांति की क्रूरता पर हैरान है हर कोई
एक मां इतनी क्रूर हो सकती है, इससे खल्लाबाद के लोग देवराज व हिमांशु की मौत के बाद रूबरू हुए तो हैरान रह गए। शांती का स्वभाव उग्र था और वह अपने व परायों का फर्क खूब समझती थी। देवराज के बेटे दिव्यांशु व हिमांशु को वह फूटी आंख नहीं देखना चाहती थी। देवराज का हर वह सपना शांती ने चूर कर दिया, जिसके लिए उसने दूसरी शादी की थी। शांती ने घर आते ही बच्चाें पर कहर बरपना शुरू कर दिया था। देवराज व हिमांशु की मौत के बाद इस घटना के लिए गांव के लोग शांती को ही कोस रहे हैं।
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