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नहीं आए डीआईजी जेल में अनशन जारी

Sat, 24 Dec 2016 12:56 AM IST
कौशाम्बी ब्यूरो
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जिला कारागार में बंदियों का अनशन जारी है। शुक्रवार को निरीक्षण के लिए डीआईजी जेल को आना था, लेकिन वह नहीं आए। इससे जेल प्रशासन ने समझौता कराने का प्रयास किया, लेकिन बंदी अपनी मांग पर अड़े रहे। मामला बिगड़ता देख जेल अधीक्षक  ने अनशन पर बैठे बंदियों से पूछताछ की। बंदियों ने मारपीट की बात बताई और कार्रवाई कराने की मांग की।
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जिला जेल में 19 दिसंबर को वसूली को लेकर बंदी रक्षकों ने कैंटीन में बंदी राममिलन पाल, नियाज आलम, आनन्द बाबू, वीरेंद्र सिंह, पंचम लाल, संजीव सिंह उर्फ लसटाकी आदि को पीटा था। 25 हजार रुपये न देने पर उनके साथ मारपीट की गई थी। इसकी शिकायत कारागार मंत्री से आनंद बाबू व राममिलन के परिजनों ने की थी। बंदी रक्षकों पर कार्रवाई न होने से नाराज बंदियों ने जेल के भीतर अनशन शुरू कर दिया है। वह गुरुवार से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीआईजी जेल संतोष श्रीवास्तव ने शुक्रवार को निरीक्षण कर बंदियों से पूछताछ करने की बात कही थी।

डीआईजी जेल के आने की संभावना को देखते हुए जेल प्रशासन के होश उड़े थे। बताया जाता है कि शुक्रवार को डीआईजी नहीं आए तो जेल प्रशासन ने समझौता कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसका बंदियों ने विरोध किया। बात नहीं बनी तो जेल अधीक्षक एचआर दोहरे ने अनशन पर बैठे बंदियों से बातचीत की। उन्होंने मारपीट करने वाले रक्षकों की जानकारी दी। साथ ही उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जेल अधीक्षक ने आश्वासन दिया है, लेकिन बंदी इससे संतुष्ट नहीं है। उधर शुक्रवार दोपहर बाद बंदियों के परिजनों ने एसपी से शिकायत की। साथ ही जांच कराकर कार्रवाई कराने की मांग की।   वहीं बताया जाता है कि जिला कारागार के भीतर बंदियों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है। जेल के भीतर बंदी कई गुटों में बंट गए हैं। जेल के भीतर होने वसूली भी बंदियों के ही मार्फत होती है। यहीं से सारा खेल बिगड़ा है। डीआईजी (जेल) संतोष श्रीवास्तव का कहना है कि शुक्रवार सुबह जेल अधीक्षक ने उन्हें बताया था कि बंदी रक्षकों से मारपीट हुई थी। इस संबंध में वह कार्रवाई कर रहे हैं। यदि कार्रवाई नहीं होती है तो वह इस मामले में अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे।
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