सरसवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में जलाई गई दवाओं के लिए वार्ड ब्वाय व फार्मासिस्ट को जिम्मेदार प्रभारी ने ठहराया है। इस घटना के बाद से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है। अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। जांच शुरू होते ही सरसवां पीएचसी के कर्मचारी अपना-अपना पल्ला झाड़ने लगे हैं।
बताया जाता है कि सरसवां पीएचसी में शुक्रवार को लाखों रुपये की दवाएं जला दी गई थीं। इसके अलावा कीमती सीरप को नाले में फेंक दिया गया था। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हंगामा किया तो प्रभारी डॉ. अशोक मौर्य हरकत में आए और मौका-मुआयना करने के बाद फार्मासिस्ट एसपी सिंह व वार्ड ब्वाय शशांक रंजन वर्मा पर कार्रवाई की तलवार लटका दी गई है। प्रभारी का कहना है कि प्रथम दृष्टया इन्हीं दोनाें की भूमिका संदिग्ध है। इनका वेतन भी रोक दिया गया है। प्रभारी ने यह कार्रवाई कर अपना पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन वह यही नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर इन दवाओं को जलाने की वजह क्या थी? वह यह भी कहते हैं कि जो सीरप नाले में फेंके गए हैं वह आयुर्वेदिक हैं। ये कहां से आए, इसका भी पता वह लगवा रहे हैं। इसके अलावा पीएचसी के अन्य कर्मचारी भी इस मसले को लेकर चुप्पी साधे हैं। इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी जिले से कोई भी टीम जांच के लिए नहीं भेजी गई। न ही अधिकारियों ने कोई दिलचस्पी दिखाई। जबकि एडी हेल्थ ने कहा था कि वह इसकी जांच कराएंगे।