नवरात्र में दिल्ली से दर्शन के लिए शीतलाधाम आए दो परिवारों के 10-12 लोगों को पुलिस ने मंगलवार को दौड़ा-दौड़ाकर लाठियों से पीटा। ये सभी मंदिर परिसर में झाड़-फूंक करवा रहे थे। पुलिस ने पहले उन्हें वहां से हट जाने को कहा था जिस पर विवाद हो गया था। पुलिस की लाठियों की चपेट में आकर मासूम बच्चे समेत नौ लोग लहूलुहान हो गए। इससे मंदिर परिसर और मेले में अफरातफरी मच गई। भीड़ जुटने पर हमलावर सिपाही चले गए। मामले में सीओ सिराथू ने ऐसी किसी भी घटना की जानकारी होने से साफ इनकार किया।
दिल्ली के जेजे कालोनी नांदलोई निवासी ओनीलाल मंगलवार को परिवार और पड़ोसी परिजनों को लेकर कौशाम्बी के शक्तिपीठ मां शीतलाधाम (कड़ा ) दर्शन को आए थे। बताया जा रहा है कि दर्शन के बाद ओनी की बहू ऊषा देवी पत्नी अनाज किशोर मंदिर परिसर में झूमने लगी। तभी मंदिर के चबूतरे पर बैठे एक व्यक्ति ने झाड़फूंक शुरू कर दी। वहीं दोनों परिवार के सभी सदस्य भी बैठ गए। चबूतरे पर भीड़ लगाकर बैठने पर ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने विरोध किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सिपाही अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें चबूतरे से नीचे उतारने लगे। इस दौरान कहासुनी हो गई। बहस से भड़के पुलिसवालों ने दोनों परिवार के लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया।
इस दौरान जो भी सामने पड़ा सिपाहियों ने उसकी पिटाई कर दी। इससे अनाज किशोर (40), राहुल (17), सिमरन (11), खुशी (05), महक (06), मुस्कान (06), सुनैना (08), नैना (10) और शुभम (03) आदि जख्मी हो गए। घटना से मंदिर और मेला परिसर में अफरातफरी मच गई। दर्शनार्थियों की पिटाई होती देख भीड़ जुटने लगी, तो पुलिसवाले चले गए। दोनों परिवारों के घायल लोग करीब घंटेभर तक वहीं पड़े कराहते रहे। फिर स्थानीय अस्पताल जाकर इन लोगों ने मरहम पट्टी कराई। मामले में पुलिस अधीक्षक वीके मिश्र ने बताया कि जो लोग दिल्ली से आए थे वे खुद पर देवी का प्रकोप दिखाकर अन्य दर्शनार्थियों को ठगने का काम करते थे। मंदिर के पुजारियों के कहने पर पुलिस ने उन्हें यह सब करने से मना किया था। दावा किया कि पुलिस द्वारा दर्शनार्थियों के साथ किसी तरह की कोई मारपीट नहीं की गई है।
धर्मस्थलों पर भीड़ के बेकाबू होने से कई बार जानलेवा हादसे हुए हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति मंगलवार को शक्तिपीठ मां शीतला के धाम में भी संभव थी। बता दें कि मंदिर के मुख्य चबूतरे पर हुई कहासुनी के दौरान मेला ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों ने झाड़-फूंक करवा रहे लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया था। इससे मेले में अफरातफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि पुलिस की पिटाई के दौरान घबराकर भागे कई लोग गिर भी गए थे। ऐसे में यदि यही भगदड़ और तेज होती, तो गिरे लोग कुचल जाते। इससे अनहोनी भी संभव थी।