विकास खंड कौशाम्बी के एक गांव के लोगों के कदम घर से निकलते ही कीचड़ में पड़ रहे हैं। गांव में तालाब न होने से जलनिकासी के लिए नाली भी नहीं बन पा रही है। इसके चलते घरों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। सदर विधानसभा क्षेत्र के इस गांव की समस्या की ओर न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न ही अफसरों ने। समस्या का समाधान न होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
बंजर मजरा गोइंठा की आबादी लगभग एक हजार है। लगभग सवा सौ घरों के लोग रास्ते में जलजमाव की समस्या से कई वर्षों से जूझ रहे हैं। गांव में खड़ंजे का निर्माण तो कराया गया पर नालियां नहीं बन सकी। इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि नाली बनवाई जाए तो उसका पानी कहां गिराया जाय। गांव में एक अदद तालाबी भूमि भी नहीं। इसके चलते नाली का निर्माण नहीं हो पा रहा है। नाली न बनने से घरों का पानी सड़कों पर फैला रहता है। यह हाल तो गर्मी और जाड़े के मौसम का है। बारिश के दिनों में तो लोगों को गांठ बराबर पानी से गुजरना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के अलावा डीएम और सीडीओ को भी समय-समय पर ग्राम प्रधान ने जानकारी दी। लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके चलते ग्रामीणों को घर से निकलते ही अपने कदम गंदे पानी और कीचड़ में रखने पड़ते हैं।
बताया जाता है कि बंजर गांव के बगल स्थित उरई असरफपुर में जलनिकासी के लिए नाला बना है। इस नाले से गांव का पानी किलनहाई नदी में जाता है। यदि बंजर गांव से नाली बनवाकर उरई असरफपुर के नाले में मिलवा दिया जाए तो ग्रामीणों को समस्या से निजात मिल सकती है। लेकिन एक किलोमीटर लंबी इस नाली को बनवाने में लाखों रुपये का बजट चाहिए। छोटी ग्राम सभा होने की वजह से राज्य व तेरहवें वित्त से धनराशि पर्याप्त नहीं मिल पाती। इसके चलते ग्रामसभा स्तर से एक किलोमीटर नाली का निर्माण संभव नहीं है। यही कारण है कि जलनिकासी की समस्या अर्से से बरकरार है। ग्राम प्रधान सूर्य बली का कहना है कि ग्राम सभा में इतना बजट नहीं रहता कि एक किलोमीटर नाली का निर्माण कराया जा सके। ग्रामीणों को समस्या से निजात दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों व जिले स्तर के अफसरों से कई बार मांग की गई। आश्वासन के अलावा आज तक कुछ भी नहीं मिला। समस्या जस की तस बनी हुई है।