परिषदीय स्कूलों में नए सत्र शुरुआत को पांच दिन हो चुके हैं। शिक्षण सत्र तो शुरू करा दिया गया, लेकिन छात्रों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया। अमर उजाला की पड़ताल में कुछ ऐसे स्कूल मिले जहां पर पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं थी। कई स्कूलों के शौचालय भी बदहाल मिले। जबकि पिछले दिनों कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।
जिले में 1092 परिषदीय स्कूल हैं। यहां 1.65 लाख बच्चों को पंजीकरण है। इनमें से एक लाख के करीब बच्चे ही स्कूल नियमित पहुंच रहे हैं, लेकिन उनको वह सुविधा नहीं मिल रही है, जो जरूरी होती है। विद्यार्थी आधी-अधूरी सुविधा के बीच शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। स्कूलों में कंपोजिट ग्रांट भेजी जा चुकी है,इसके बाद योजनानुसार काम नहीं हुआ।
सीन एक - उच्च प्राथमिक विद्यालय भड़ेसर में 96 बच्चों का नामांकन है। शनिवार को 77 बच्चे विद्यालय में आए। यहां तैनात तीन शिक्षक पढ़ाते मिले। विद्यालय में लगे दो हैंडपंप खराब थे। पानी के लिए विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ता है। वर्षा के बाद से अब तक हैंडपंप को नगर पालिका ने सही नहीं कराया। स्कूल में खेल का मैदान नहीं है। ऐसे में खेल सामग्री का बेहतर उपयोग नहीं हो पाता।
सीन दो- प्राथमिक विद्यालय गोइठा कौशाम्बी में 196 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। शनिवार को केवल 90 बच्चे ही स्कूल में मिले। विद्यालय परिसर गंदगी से पटा मिला। शौचालय की हालत बेहतर नहीं मिली। प्रधानाध्यापक रामनरेश मिश्र ने बताया कि छात्र संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है।
सीन तीन- प्राथमिक विद्यालय दाई का पुरा का परिसर भी गंदगी से पटा मिला। यहां एमडीएम शेड बना है, लेकिन इसका प्रयोग नहीं होता। एमडीएम में शनिवार को सब्जी चावल बनाया गया। इसमें पानी ज्यादा दिखा और सब्जी कम रही। शौचालय गंदा मिला। प्रधानाध्यापक कमलेश कुमार ने बताया कि पंजीकृत 43 विद्यार्थियों में 25 विद्यालय आए हैं। स्कूल न आने वालों को छोड़कर अन्य को किताबें दी जा चुकी हैं।
स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। पानी की समस्या की जानकारी नहीं है। जहां जो भी समस्या है, उसका निदान किया जाएगा। - डॉ. कमलेंद्र कुशवाहा, बीएसए
भड़ेसर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में खराब हैंडपंप दिखाता छात्र। संवाद