कंप्यूटर के सवालों का जवाब दे पाने में दोआबा के चालक उलझ गए हैं। लाइसेंस बनवाने के लिए पूछे जाने वाले सवालों का जवाब वह निर्धारित समय पर नहीं दे पा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि पांच माह में जहां आवेदनों में कमी आई वहीं कुल 258 ही परीक्षा पास कर लाइसेंस पाने में कामयाब रहे।
शासन के निर्देश पर जिले के एआरटीओ कार्यालय में दो पहिया, चार पहिया व हैवी लाइसेंस की आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। 26 अगस्त 2016 से लागू हुई ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली जिले के चालकों के लिए मुसीबत बन गई है। कंप्यूटर में आवेदक को 16 सवालों का जवाब देना पड़ता है। इनमें से दस सवालों का जवाब सही देने वाला आवेदक ही पास माना जाता है। प्रत्येक सवाल के लिए विभाग ने 30 सेकंड का समय निर्धारित कर रखा है।
कंप्यूटर के इन सवालों में ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदक उलझ कर रह गए हैं। 26 अगस्त 2016 से 31 जनवरी 2017 के आंकड़ों पर जाएं तो जिले के 1838 लोगों ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया। इनमें से महज 258 आवेदकों को सफलता मिल सकी है। बाकी के आवेदकों के हाथ मायूसी ही लगी। कंप्यूटर के सवालों का सामना न कर पाने के चलते अब आवेदन की रफ्तार भी धीमी हो गई है। अब सिर्फ अपने को प्रतिभावान मानने वाले पढ़े-लिखे लोग ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करते देखे जा रहे हैं।
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने के बाद आवेदन की रफ्तार थम सी गई है। कंप्यूटर पर सवाल पूछे जाने की ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से पहले कार्यालय में लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों की खासी भीड़ लगी रहती थी। प्रतिदिन 50 से 60 आवेदक लाइसेंस फीस जमा करने के लिए लाइन लगाकर लिपिक की खिड़की पर खड़े होते थे। माह में यह आंकड़ा एक हजार से अधिक पहुंच जाता था। इनमें से एक-दो को छोड़ लगभग सभी को लाइसेंस जारी भी हो जाता था और विभाग को अच्छी आमदनी भी होती थी। अब न आवेदकों की भीड़ दिख रही है और न ही पुराने आकड़े से लाइसेंस जारी हो रहे हैं। इससे विभाग के राजस्व पर भी खासा असर पड़ा है।
एजेंटों की कमाई पर लगा बट्टा
एआरटीओ कार्यालय में एजेंटों का अच्छा खासा दखल रहता था। कार्यालय गेट के सामने वह अपनी-अपनी कुर्सी लगाकार सुबह से बैठ जाते थे। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आने वाले लोग एजेंट के माध्यम से आवेदन करते थे। एजेंट निर्धारित फीस का चार गुना अधिक धन लेकर आवेदक को लाइसेंस जारी करा देेते थे, लेकिन ऑनलाइन आवेदन और कंप्यूटर पर आवेदक से पूछे जाने वाले सवालों ने एजेंटों की रोजी-रोटी पर बट्टा लगा दिया है। अब वह वाहन टैक्स, फिटनेस आदि के कार्यों में मिलने वाली रकम से ही जीवन यापन कर रहे हैं।
ऑनलाइन आवेदन शुरू होने के बाद आवेदकों की संख्या घटी है। इस व्यवस्था के लागू होने से जानकारों को ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी हो रहा है। इससे राजस्व भले ही घटा हो पर हादसों में कमी आना तय है।
शंकरजी सिंह, एआरटीओ