विद्यालयों में अपशिष्ट पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए खाद के गड्ढों का निर्माण कराया जाएगा। इन गड्ढों में जैविक कचरे से खाद तैयार की जाएगी, जिसका उपयोग किचन गार्डन में होगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कचरे के उचित निस्तारण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
विद्यालयों से निकलने वाले पत्तों, घास और भोजन के बचे हुए हिस्सों जैसे जैविक कचरे का उपयोग खाद बनाने में किया जाएगा। इसके लिए गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जैविक कचरे को खाद के गड्ढों में डालकर खाद तैयार होगी। इससे विद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने में भी मदद मिलेगी।
बीएसए कमलेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि खाद के गड्ढों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सदुपयोग की आदत विकसित होगी।
खाद के गड्ढों से तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल विद्यालयों के किचन गार्डन में होगा। इस खाद से सब्जियां और पौधे उगाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को जैविक खाद के महत्व की जानकारी मिलेगी। साथ ही, उन्हें पौधों की देखभाल की व्यावहारिक जानकारी भी प्राप्त होगी।