मंझनपुर। यदि कभी रात में फंस गए और कहीं ठिकाना न मिला तो रैन बसेरा ही आसरा बनता है। हालांकि, मंझनपुर के रैन बसेरे में ठंड की दस्तक के बाद भी अव्यवस्थाएं हैं। यहां अभी सब कुछ अस्त-व्यस्त है।
मुख्यालय का रैन बसेरा डीएम आवास के पीछे की गली में बना है। यह गली अधिकारियों व कर्मचारियों के हॉस्टल की दीवार के पास खत्म हो जाती है। डीएम के फार्म हाउस के बीच बने रैन बसेरे में सुविधाओं के नाम पर फटे पुराने गद्दे मिलेगें।
एक दो शौचालयों को छोड़ दें तो अन्य शौचालय गंदगी से पटे हैं। जो शौचालय प्रयोग में लाए जा रहे हैं। गलती से अपने उसका दरवाजा खोला तो एक दुर्गंध आपको वहां से हटने के लिए मजबूर कर सकती है।
हालांकि यहां रोज कोई न कोई रहने के लिए आता है, लेकिन मजबूरी में उसे यहां रात बितानी पड़ती है। यहां पर चार कर्मचारी तैनात हैं। इनमें दो रात में और एक महिला व एक पुरुष कर्मचारी दिन में तैनात रहते हैं।
पुताई में गंदे हो रहे गद्दे
इन दिनों रैन बसेरे में पुताई का काम हो रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि पुताई के दौरान गद्दों को नहीं हटाया गया। इसके कारण पेंट व प्राइमर इन पर गिरता है। इससे गद्दे और खराब हो रहे हैं। एक कमरे में फटा पुराना गद्दा मिला। उसपर फटी बेडशीट पड़ी थी। दूसरे कमरे में गद्दों का ढेर था, जो प्रयोग के लायक नहीं दिख रहे थे। जो गद्दे कमरों में लगे हैं। उनकी भी हालत बेहतर नहीं है। एक दो कमरे की खिड़कियों के कांच टूटे हैं। जो ठंड में लोगों के लिए परेशानी का कारण बनेंगे।
परीक्षा व शादी वाले दिन रहती है भीड़
केयर टेकर छोटेलाल ने बताया कि यहां आम दिनों में सात से आठ लोग आते हैं, लेकिन यदि कोई परीक्षा या शादी पड़ी तो लोगों की संख्या 50 के करीब पहुंच जाती है। यहां प्रदेश के तमाम स्थानों से लोग आते हैं। एक शादी में शामिल होने कुशीनगर से आए अमित कुमार ने बताया कि रैन बसेरे में आना मजबूरी है। यहां रहना नहीं है, थोड़ी देर रुककर शादी में जाना है। अन्य किसी स्थानीय जगह की जानकारी भी नहीं है।
ठंड को देखते हुए सभी नगरों के ईओ को रैन बसेरे में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी यदि नगर पालिका परिषद मंझनपुर में अव्यवस्था है तो रविवार को ही इसे चेक कराया जाएगा। रैन बसेरा में आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही संबंधित से जवाब तलब किया जाएगा।
- अरुण कुमार गोंड, एडीएम वित्त एवं राजस्व
प्रयागराज आनंद भवन में शैक्षिक भ्रमण के दौरान बच्चों के साथ खड़े शिक्षक। स्रोत: विद्यालय