ग्रामीण स्वच्छता अभियान को जनता और अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के अंतर्गत दो वर्षों में ग्राम सभाओं को दिए गए हजारों शौचालय धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। आधी-अधूरी रकम मिलने से शौचालय का निर्माण पूरा नहीं हो सका। ऐसे में अब लाभार्थी शौचालय के ढांचे को भी मिटाने लगे हैं।
स्वच्छता अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2012-13 व 13-14 में जिले भर की ग्राम सभाओं में को हजार दो सौ शौचालयों का आवंटन किया गया था। इनके निर्माण के लिए 46 सौ रुपये पंचायती राज विभाग व 45 सौ रुपये मनरेगा से दिया जाना था। लाभार्थियों का चयन करने के बाद ग्राम प्रधानों ने पंचायती राज विभाग से मिला धन आवंटित करते हुए निर्माण कार्य शुरू करा दिया था। शौचालयों का आधा निर्माण होने के बाद मनरेगा अंश की मांग की गई। चार साल का लंबा समय बीतने के बाद भी शौचालय के लाभार्थियों को मनेरगा का अंश नहीं मिल सका। मनरेगा अंश नहीं मिलने के बाद लाभार्थियों के शौचालय अधर में लटके रहे। अब लाभार्थी शौचालयों के ढांचे को भी हटाना शुरू कर दिए हैं। अधर में लटके शौचालयों का निर्माण पूरा कराने के लिए पंचायती राज विभाग ने कई बार निदेशक पंचायती राज को पत्र भेजा पर मनरेगा अंश की रकम नहीं मिल सकी। ऐसे में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के 11 हजार 200 शौचालय शासन की लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं।
धन मिलने की लाभार्थियों ने छोड़ी उम्मीद
दो वित्तीय वर्ष में 11 हजार दो सौ शौचालयों का लाभ पाने वाले लाभार्थी आधा-अधूरा निर्माण कराकर मनरेगा अंश मिलने का इंतजार कर रहे थे। लगभग चार साल का समय बीत जाने के बाद मनरेगा अंश नहीं मिलने से लाभार्थियों ने उम्मीद छोड़ दिया है। रुपया नहीं मिलने से अधिकतर लाभार्थी शौचालयों को तोड़कर शिनाख्त मिटा रहे हैं। ग्रामसभा के जिम्मेदार भी नक्शे से गायब हो रहे शौचालयों को लेकर कुछ नहीं कर पा रहे हैं।
वर्ष 2012-13 व 13-14 में 11200 शौचालयों का निर्माण कराने के लिए 46 सौ की दर से धनराशि ग्रामसभाओं को दी गई थी। मनरेगा का 45 सौ नहीं मिलने से निर्माण अधर में है। इसके लिए निदेशक पंचायती राज को पत्र भेजा गया है।
कमल किशोर, डीपीआरओ