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बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में भी खिलवाड़

Tue, 23 Dec 2014 11:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कौशाम्बी
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में जमकर खिलवाड़ हो रहा है। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए टीमों को मिले वाहन सिर्फ कागजों पर ही फर्राटा भर रहे हैं। आलम यह है कि ज्यादातर अस्पतालों में वाहन ही नहीं हैं। इसके बाद भी कागजों पर वाहन चलाकर डॉक्टर और एजेंसी मालिक रकम डकार रहे हैं। ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधिकारी से शिकायत की है। डीएम ने अपरजिलाधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया है।
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स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में फर्जीवाड़ा करके रकम में गोलमाल का खेल चल रहा है। अमिरसा गांव के रहने वाले बेदमणि त्रिपाठी, उमरावा के रहने वाले रमाकांत मिश्र, महेवा के संतोष कुमार, नागचौरी के पुरवा के आरके पांडेय का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य ग्रामीण मिशन और बाल स्वास्थ्य गांरटी योजना के तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सकों की टीमों को मिले वाहन सिर्फ कागजों पर फर्राटा भर रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने 17 वाहनों को बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं एनआरएचएम के अन्य कार्यो के लिए निविदा के तहत एक एजेंसी से लिए गए हैं। आरोप है कि सिर्फ 5 अस्पतालों में वाहन चलाए जा रहे हैं। बाकी अन्य अस्पतालों में वाहन सिर्फ कागजों पर चलाए जा रहे हैं। इसमें एजेंसी मालिक और अस्पताल अधीक्षकों की मिलभगत है। जिम्मेदार फर्जीवाड़ा करके वाहनों की रकम डकारी जा रही है। सूत्रों की माने तो निविदा के तहत जो वाहन अधिगृहीत किए गए थे, वे वाहन अस्पतालों में दिखते ही नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वाहनों को एक साथ बुला लिया जाए तो, सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। ग्रामीणों ने सोमवार को जिलाधिकारी से शिकायत की। डीएम मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर जिलाधिकारी को जांच करने का निर्देश दिया है। डीएम राजमणि यादव का कहना है कि जांच कराई जा  रही है। यदि वाहनो के संचालन में गड़बड़ी सामने आती है तो एजेेंसी मालिक और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।

 बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत अस्पतालों में एजेंसी के माध्यम लिए गए ज्यादातर वाहनों द्वारा टैक्स की चोरी की जा रही है।  टैक्सी परमिट के बिना ही निजी वाहनों को फर्जीवाड़ा करके अस्पतालों में चलाया जा रहा हैं। इससे जिला प्रशासन और परिवहन विभाग को महीने में लाखों रूपये राजस्व की चपत लग रही है। इस कारनामें में एक संविदा कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध है। डीएम राजमणि यादव का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। आरोप की पुष्टि होने पर वाहनों को  सीज करने के साथ ही एजेंसी मालिक को जेल भेजा जाएगा।
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