विभागीय लापरवाह कर्मचारियों पर शासन का शिकंजा जल्द कस दिया जाएगा। इसके लिए विभागवार तैयारी शुरू कर दी गई है। डीएम ने विभागाध्यक्षों को अपने-अपने कार्यालय में सीसीटीवी कैमरा व बायोमैट्रिक मशीन लगवाने का निर्देश दिया है, साथ इसका प्रस्ताव भी मांगा है। अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि वह हफ्ते भर के भीतर कार्यालयों में सीसीटीवी व बायोमैट्रिक मशीन लगवाएं।
जिले के कलक्ट्रेट, विकास भवन, बिजली, स्वास्थ्य सहित समस्त विभागों में देर सवेर कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारियों की मनमानी और बहानेबाजी अब नहीं चलेगी। इस पर सप्ताह भर के भीतर शिकंजा कस दिया जाएगा। इसके लिए विभागाध्यक्षों द्वारा न केवल अपने कक्ष में बल्कि कर्मचारियों की सीटों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा। कैमरा लगने के बाद विभागीय कर्मचारी सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक अपनी सीट पर मौजूद रहे या फिर इधर-उधर गप्पे मार रहे थे इसे विभागाध्यक्ष आसानी से देख सकेंगे। जिस दिन विभागाध्यक्ष किसी काम से बाहर रहे तो वह सीसीटीवी की फुटेज खंगाल कर कर्मचारियों की कार्यशैली को परख सकेंगे।
इसके अलावा सुबह दस बजे से लेकर दस बजकर दस मिनट के भीतर अधिकारियों और उनके कर्मचारियों को बायोमैट्रिक मशीन के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होगी। निर्धारित समयावधि के भीतर उपस्थिति नहीं दर्ज होने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई तय है। इस आशय का फरमान सूबे के मुख्यमंत्री ने तीन दिन पहले जारी कर दिया है। छुट्टी से लौटने के बाद डीएम ने मुख्यमंत्री के फरमान को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागाध्यक्षों से सीसीटीवी व बायोमैट्रिक मशीन लगवाने का निर्देश देते हुए कार्रवाई का प्रस्ताव भी मांगा है।
काम में आएगी पारदर्शिता
विभागों और पटल देख रहे लिपिकों के कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लगने वाली बायोमैट्रिक मशीन से जहां अधिकारी व कर्मचारी समय से दप्तर पहुंचेंगे वहीं कार्यों में पारदर्शिता आएगी। कर्मचारियों में इस बात का भय बना रहेगा कि यदि वह देर तक सीट से गायब रहे तो अफसर उनसे पूछताछ भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं पटल का काम पूरा होने में देरी होने पर उनकी काम करने के समय का आंकलन भी आसानी से अफसर कर सकेंगे। इससे कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार होना तय है।
लोकेश एम ने कलक्ट्रेट में लगवाई थी मशीन
जिले की कमान संभालने के बाद तत्कालीन डीएम लोकेश एम ने वर्ष 2010 में अफसरों व कर्मचारियों की कमान कसी थी। देर से कार्यालय पहुंच रहे अफसरों को देख उन्होंने कलक्ट्रेट में बायोमैट्रिक मशीन लगवा दिया था। जिले के सभी विभागाध्यक्षों को इस मशीन में समय से पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ रही थी। इससे विभागाध्यक्षों और उनके मातहतों की आदतों में सुधार आ गया था। तत्कालीन डीएम का तबादला होते ही यह व्यवस्था धड़ाम हो गई थी। अब इसकी नए सिरे से पहल हो रही है।
अधिकारी व कर्मचारी समय से कार्यालय पहुंचकर काम करें। शासन की यही मंशा है। शासन की मंशा के अनुरूप कार्य करने के लिए विभागाध्यक्षों को सीसीटीवी कैमरा व बायोमैट्रिक मशीन लगाने का निर्देश देते हुए प्रस्ताव मांगा गया है।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम