आठ दिनों के भीतर दो बच्चों ने आत्मघाती कदम उठाया। इन घटनाओं ने समाज को झकझोर दिया है। छह जून को महेवाघाट के जमुनापुर गांव में 13 वर्षीय नीरज ने मां की डांट के बाद फंदे से लटक कर जान दे दी थी।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह का कहना है कि बच्चों और किशोरों में मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। अचानक पाबंदी से बच्चे गुस्सा, निराशा और आवेग में गलत कदम उठा सकते हैं।
कभी कभी घटना के पीछे अवसाद, चिंता, पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक तनाव, सामाजिक अलगाव, दोस्तों से विवाद, नींद की कमी और भावनाओं को नियंत्रित न कर बच्चों के लिए मुश्किल होता है। किशोरावस्था में बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है और वे छोटी बातों को भी अपनी असफलता या अपमान के रूप में लेने लगते हैं। बच्चों की गलती पर तुरंत गुस्सा करने के बजाय उनसे बातचीत करें।