मंझनपुर। नागरिकता संसोधन कानून को लेकर मचे हो-हल्ला के बीच देशभर में शरणार्थियों की तलाश तेज हो गई है। कौशाम्बी में भी ऐसे लोगों की खोजबीन की जा रही है। हालांकि, अभी तक यहां एक भी सख्श रिफ्यूजी नहीं पता चला। अलबत्ता, मोहब्बत में सरहद पार कर आने वाले सात महिलाएं जरुर यहां पर सालों से लांग टर्म (लम्बे समय) के वीजा पर रह रही हैं। इसी शोर-शराबे के बीच इन महिलाओं को भारत में नागरिकता की अम्मीद जगी है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में नागरिकता संसोधन कानून लागू किया है। इसे लेकर देशभर में हलचल मची हुई है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से भागकर भारत आए लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस और खूफिया एजेंसियां इसे लेकर सक्रिय हैं। अब तक की खोजबीन में जिले के अंदर ऐसे एक भी व्यक्ति का पता नहीं चला, जो सरहद पारकर कौशाम्बी में चोरी-छीपे रह रहा हो। हां इस हो-हल्ला के बीच पाकिस्तान की खुशनूद आफ्ता, शायरा बेगम, कनीज फात्मा, सबा रिजवी, शहरसिमी, आयशा सुहेल व बांग्लादेश की शमीम आरा आदि महिलाओं को भारत में नागरिकता मिलने की उम्मीद जरूर जगी है। ये वो महिलाएं हैं जो भागकर तो नहीं बल्कि हिंदुस्तानियों की मोहब्बत में सरहद पार कर आई हैं। ये महिलाएं जिले के युवाओं संग बकायदा निकाह कर लंबे समय के (लांग टर्म) वीजा पर रह रही हैं। इनमें से कोई 1980 में आई तो कोई 1987 में। पाकिस्तान की एक महिला ने तो पिछले साल ही यहां के युवा से निकाह किया है।
वर्ष 2000 के पहले से शादी कर परिवार के साथ रह रही पांच महिलाएं उम्र के आखिरी दहलीज पर खड़ी हैं। बताया जा रहा है कि इनके पुरखे यहीं के हैं। बंटवारे के वक्त परिवार के कुछ सदस्य सरहद पार जरूर कर गए थे। पर, पारिवारिक प्रेम बराबर बना रहा। इस वजह से इन लोगों ने यहां के युवाओं से निकाह कर लिया था। हालांकि, नए कानून से इन महिलाओं का ख्रास मतलब नहीं हैं। क्योंकि, ऐसे मामलों में सरकार पहले शार्ट और फिर लांग टर्म बीजा देने के बाद गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही करती है। फिर भी नागरिकता कानून को लेकर इनकी उम्मीदें जरूर जाग गई हैं। इनके परिजनों ने नागरिकता को लेकर पैरवी तेज कर दिया है।
बांग्लादेशी जियाउद्दीन को भी नागरिकता की दरकार
मंझनपुर। छह साल पहले वर्ष 2014 में अपने वालिद के इंतकाल के बाद बांग्लादेश से कौशाम्बी आए जियाउ्ददीन को भी नए कानून से उम्मीद जगी है। बताया जा रहा है कि बटवारे के वक्त जिया उ्ददीन के अब्बा परिवार के अन्य सदस्यों को भारत में छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। जियाउद्दीन बांग्लादेश में ही पैदा हुआ है। इसलिए उसकी नागरिकता को लेकर कानूनी अड़चन आ रही है। नया कानून लागू होने के बाद जियाउ्ददीन के भी कवायद शुरू कर दिया है।