वर्ष 2016 बीतने में कुछ ही दिन बचे हैं। लोगों को बड़ी उम्मीद थी कि जिले को रोडवेज बस डिपो मिल जाएगा, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ। करोड़ों रुपया मुआवजा देने के बाद भी अधिकारी जमीन का विवाद सुलझा नहीं सके हैं। इस वजह से डिपो का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इससे सफर करने वालों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2009 में जिला मुख्यालय में रोडवेज बस डिपो के लिए चार बीघा भूमि का अधिग्रहण किया गया था। भूमि का अधिग्रहण होने के बाद अधिकारियों ने करोड़ों रुपये का मुआवजा भी किसानों को दिया। इनमें से दो किसानों ने मुआवजा की रकम लेने से इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि मुआवजा कम दिया जा रहा है। यह मामला अदालत में चला गया। इसके बाद अधिकारियों ने तमाम प्रयास किए, लेकिन बात नहीं बन सकी। मामला अदालत में जाने के बाद जिले के अधिकारी इस समस्या का निस्तारण नहीं करा सके।
निर्माण के लिए आया लगभग एक करोड़ रुपया वापस जा चुका है। सात साल से बस डिपो बनने का इंतजार जिले के लोग कर रहे हैं। सुबह सात बजे से लेकर शाम सात बजे तक ही वाहन मिलते हैं। वह भी प्राइवेट। इसके बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। आवागमन के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है, जब जिले की सभी सड़कें चौड़ी हो गई हैं। चित्रकूट व कौशाम्बी को जोड़ दिया गया है। नेशनल हाईवे से मुख्यालय को भी जोड़ा जा चुका है। इसके बाद भी बस डिपो की दरकार लोगों को अखर रही है।
रोडवेज बस डिपो बनवाने की पहल की जा रही है। अदालत में मामला लंबित है। निर्णय आते ही डिपो का कार्य शुरू कराया जाएगा।
अखंड प्रताप सिंह, डीएम