मंझनपुर। जिला पंचायत का अध्यक्ष पद हथियाने से ज्यादा कौशाम्बी में बसपा सपा प्रत्याशी मधुपति से कुर्सी दूर रखने की कवायद में लगी है। इसके लिए पार्टी नेता और रणनीतिकार गोटे बिछाने में जुट गए हैं। बसपाई सत्ता की हनक को बेअसर करने के लिए सपा से जुड़े एक विद्रोही पर दांव लगाने की फिराक में हैं। उसे पार्टी में शामिल करके उम्मीदवार बनाने की शर्त रखी गई है। हालांकि चर्चा है कि वह दल बदलने के बजाय निर्दल प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरने को राजी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव 7 जनवरी को है। तारीख घोषित होते पंचायत की इस सबसे बड़ी कुर्सी पर कब्जे की कवायद शुरू हो गई है। कौशाम्बी में मुख्य मुकाबला सपा, बसपा के बीच है। सपा ने पूर्व अध्यक्ष मधुपति को उम्मीदवार घोषित किया है। बसपा की ओर से भी शिखा सरोज समेत एक-दो नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा सियासी गलियारे में इसकी भी कानाफूसी है कि बसपा पार्टी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने से ज्यादा सपा प्रत्याशी को कुर्सी से दूर रखने की कोशिश में है।
बसपा का ये सियासी पैंतरा सपा से प्रत्याशी के रूप में मध्ुापति के नाम की घोषणा होने के बाद से है। बसपाई इस चुनाव में अपनी हनक दिखाने के लिए रात-दिन जुटे हैं। वे सपा में स्थानीय स्तर पर आंतरिक कलह का फायदा उठाने में लगे हैं। चर्चा है कि पार्टी के कुछ बड़े नेता सपा के एक विद्रोही नेता को अपने साथ मिलाकर अपनी राजनीति को अमली जामा पहनाने में लगे हैं। चर्चाओं पर जाएं तो बसपा की शर्त है कि सपा का बागी नेता पार्टी छोड़कर नीले झंडे के नीचे आकर प्रत्याशी बने। पर, सपा नेता इस बात के लिए राजी नहीं है।
वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में जिपं अध्यक्ष के चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। ऐसे में यदि बसपा उसे निर्दल प्रत्याशी के तौर पर सर्मथन दे, तो कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव दिलचस्प बनने के आसार हैं। फिलहाल, परदे के पीछे हो रही सियासत दल और निर्दल के बीच अटकी है। हालांकि बसपा रणनीतिकारों का मानना है कि यह सौदा पटता है, तो वे सपा की राह में रोड़ अटकाकर बाजी मार ले जाएंगे।