BSA terminated eight teachers after recieving highcourt order in fake marsheet case
मंझनपुर। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से जारी बीएड के फर्जी अंकपत्र के सहारे नौकरी कर रहे जिले में तैनात आठ शिक्षक मंगलवार को सेवा से बाहर कर दिए गए। हाईकोर्ट का आदेश प्राप्त होने के बाद बीएसए ने यह कार्रवाई की। एसआईटी की जांच में इन शिक्षकों के बीएड की डिग्री फेक निकली थी।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के नाम से वर्ष 2004-05 में जारी बीएड अंकपत्र के जरिये जिले में 12 लोगों ने नौकरी हासिल की थी। मामला प्रकाश में आने के बाद एसआईटी ने जांच की तो इनमें से आठ शिक्षकों के बीएड अंकपत्र और डिग्री फेक निकली। इसका डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। चार शिक्षकों की बीएड डिग्री टेंपर्ड निकली। इन शिक्षकों ने अंकपत्र में नंबर बढ़वाए थे। नवंबर 2017 में एसआईटी ने इन शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए बीएसए कार्यालय को सीडी भेजी थी। दो वर्ष तक चली कई चरणों की जांच के बाद अगस्त 2019 को तत्कालीन बीएसए ने जिले में तैनात अर्चना देवी, अर्चना सिंह, लवलेश द्विवेदी, रावेंद्र सिंह, नूतन कुमारी समेत पांच शिक्षकों को बर्खास्तगी पत्र जारी कर दिया था।
वहीं, सीमा यादव, राजेश कुमार तथा अंजना देवी समेत तीन शिक्षकों को जनवरी 2020 में बर्खास्तगी पत्र जारी किए गए। आठों शिक्षक बर्खास्तगी का पत्र आने के बाद कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने बीते शुक्रवार को आदेश सुनाते हुए फेक अंकपत्र वाले शिक्षकों को सेवा से बाहर करने का आदेश दिया। साथ ही टेंपर्ड मार्कशीट वालों की जांच दोबारा करने के निर्देश डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय को दिए। कोर्ट का आदेश आने के बाद बीएसए प्रकाश सिंह ने मंगलवार को फेक अंकपत्र वाले आठों शिक्षकों को सेवा से बाहर कर दिया।