हार के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं का गुट अपने-अपने तरीके से कर रहा समीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति पहले से ही मजबूत नहीं आंकी जा रही थी। कई वर्गों की नाराजगी के अलावा पार्टी के कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी प्रत्याशी से नाराज चल रहे थे, जो चुनाव के दौरान प्रचार से विरत रहे। हालांकि भाजपा की हार के बाद अब वे अफसोस कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन हो या प्रत्याशी, किसी ने रूठों का मनाने का प्रयास नहीं किया।
खुलकर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं, लेकिन दबी जुबान कुछ कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा बताई। सदर विधानसभा क्षेत्र के मंडल स्तर के एक पदाधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पूरे 10 साल कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। अफसर तो दूर एक सिपाही तक उनकी नहीं सुनते। संगठन तक बात पहुंचाने पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। जनता का जब काम नहीं होगा तो कार्यकर्ताओं का कमजोर होना तय है।
चायल क्षेत्र के प्रमुख कार्यकर्ता ने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले पार्टीजनों को छोड़कर दूसरे दलों व भितरघातियाें को साथ रखा। भाजपा की नइया डुबोने में इनकी अहम भूमिका रही। अजुहा के एक पदाधिकारी का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में डिप्टी सीएम केशव मौर्य की हार के बाद पार्टी में जो अंतर्कलह पनपी थी, उसी ने लोकसभा चुनाव हरा दिया। सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाले भी अंदरखाने विपक्षी को जिताने की रणनीति बना रहे थे।
सिराथू क्षेत्र के कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कौशाम्बी में भाजपा की शिकस्त के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार प्रत्याशी की जनता से व्यक्तिगत नाराजगी रही। भले ही विपक्ष कितने भी मुद्दे उठाए। लेकिन केंद्र और प्रदेश सरकार ने गरीबों, महिलाओं, युवाओं के लिए जितने काम किए थे, वही चुनाव जिताने के लिए पर्याप्त थे। प्रत्याशी बदलने की मांग छह महीने पहले ही उठने लगी थी। फिर भी संगठन ने ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा जन सत्ता दल का साथ न होना भी भाजपा को कमजोर कर गया।
जिले में भाजपा की हार के रहे ये प्रमुख कारण
भाजपा प्रत्याशी से जनता की व्यक्तिगत नाराजगी
चुनाव व इससे पहले हुई पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी
जीत को लेकर भाजपाइयों में अत्यधिक आत्मविश्वास
चुनाव में कुंडा का जनसत्ता दल से अलग-थलग हो जाना
मतदान के ठीक पहले वायरल हुए सांसद के वीडियो
बेरोजगारी और पेपर लीक को लेकर युवाओं की नाराजगी
विपक्ष की ओर से दिया गया संविधान बचाओ का नारा
महिलाओं के खाते में एक लाख रुपये भेजने का विपक्ष का वादा
वर्ष 2022 के विस चुनाव में डिप्टी सीएम की हार के बाद पनपी रार