अलवारा झील में चहल कदमी करते पक्षी। संवाद
सर्दी की दस्तक के साथ ही अलवारा झील एक बार फिर परिंदों की स्वर्गस्थली बन गई है। हजारों किलोमीटर दूर से लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी पक्षियों ने निर्जन पड़ी इस विशाल वेटलैंड में नई रौनक भर दी है। फरवरी तक झील इन पक्षियों से गुलजार रहेगा।
इन विदेशी मेहमानों में मुख्य रूप से काले पानी के पक्षी, छोटे सफेद बगुले और नीली चमक लिए जलपक्षियों की अधिक मौजूदगी देखी जा रही है। हल्की धुंध के बीच कभी यह झुंड उड़ान भरते नजर आते हैं, तो कभी पानी की सतह पर चारा तलाशते हुए इठलाते दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो बीते वर्षों में जलस्तर कम और गाद होने से झील की चमक फीकी पड़ने लगी थी। इसके बावजूद इस बार सर्दी की शुरुआत के साथ ही प्रवासी पक्षियों ने अलवारा का रुख किया और झील एक बार फिर जीवंत हो उठी।
ग्रामीण इसे प्रकृति का तोहफा मान रहे हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर कोई रोज झील की ओर खिंचा चला आता है। परिंदों से भरी झील को देखकर उनकी आंखों में खुशी व सुकून झलकता है।
डीएफओ पंकज शुक्ला ने बताया कि हर वर्ष रूस, मंगोलिया, मध्य एशिया और हिमालय की ऊंची पर्वत श्रेणियों से प्रवासी पक्षी भारत के वेटलैंड्स में पहुंचते हैं। यहां की जलघास, मछलियों और कीटों से भरपूर भोजन व्यवस्था इनके लिए सर्दियों में जीवनदायिनी साबित होती है।